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स्वस्थ व संस्कारी संतान के लिए गर्भ संस्कार पद्धति में बढ़ा रुझान

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जम्मू। स्वस्थ, संस्कारी और ओजस्वी संतान के जन्म के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल में गर्भ संस्कार पद्धति की ओर दंपतियों का रुझान बढ़ने लगा है। आयुर्वेदिक अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भ धारण से लेकर पूरी गर्भावस्था में दंपती को परामर्श व चिकित्सा दी जाती है। गर्भस्थ शिशु का पोषण आयुष पद्धति से किया जाता है, जिससे जन्म पर नवजात शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होता है। शिशु का न सिर्फ स्वास्थ्य अच्छा होता है बल्कि उसमें संस्कार और ओजस्वी गुण भी होते हैं।
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आयुर्वेदिक अस्पताल में कार्यरत प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गुप्ता ने बताया कि स्वस्थ बच्चे की इच्छा रखने वाले दंपती अस्पताल में निशुल्क गर्भ संस्कार चिकित्सा पद्धति का सहारा ले सकते हैं। गर्भधारण के बाद मां के पेट में नौ माह की गर्भनीय प्रक्रिया होती है। हर माह नवजात में बदलाव आता है। गर्भ संस्कार पद्धति में बताया जाता है कि मां कौन से समय पर कौन सा उचित आहार ले, ताकि गर्भ में पल रहे बच्चे को भरपूर आहार के साथ सर्वश्रेष्ठ संस्कार भी मिलें। इस खास आहार के साथ रहन-सहन और आयुर्वेदिक दवाओं पर जोर दिया जाता है। इस चिकित्सा पद्धति से बच्चे में गैर संक्रामक बीमारियों का खतरा भी कम रहता है।
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योग व ध्यान से शुद्ध किया
जाता है मां-बच्चे का मन
चिकित्सा पद्धति से योग, ध्यान के साथ मां और बच्चे में मन व शरीर शुद्ध करने की प्रक्रिया की जाती है। इसके अलावा संगीत गतिविधियां करवाई जाती हैं, जिसमें नवजात का मस्तिष्क अच्छे प्रभाव में रहता है। जीवनशैली में बदलाव लाकर पौष्टिक आहार पर अधिक ध्यान दिया जाता है। डॉ. अरुण गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव जीवन में वृद्धि और विकास के आधार पर सोलह संस्कारों का विधान किया गया है। इनमें से विवाह संस्कार और गर्भाधान संस्कार का विशेष महत्व है।
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