जम्मू। केंद्रीय संस्कृत विवि श्री रणवीर सिंह कैंपस कोटभलवाल में इस सत्र से यूजी-पीजी में शैव दर्शन की पढ़ाई करवाई जाएगी। अभिनव गुप्त के समय से जम्मू-कश्मीर में शैव दर्शन चलता आ रहा है। उस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संस्कृत विवि लगातार प्रयास कर रहा है। इसके अलावा संस्कृत को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के कदम उठाए जा रहे हैं।
केंद्रीय संस्कृत विवि के निदेशक प्रो. मदन मोहन झा ने बताया कि प्रदेश में संस्कृत की लंबी परंपरा रही है। अब डोगरी से संस्कृत में भी अनुवाद किए जा रहे हैं। इससे विद्वानों को शोध करने और प्रदेश में संस्कृत का पूरा इतिहास जानने में मदद हो सकेगी। हालांकि विवि में कई सारे शोध हुए हैं, लेकिन प्रदेश में संस्कृत का प्रचार प्रसार करने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
प्रो. मदन मोहन झा ने बताया कि उन्होंने हाल में डीडीसी सदस्यों के साथ मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि दसवीं या बारहवीं तक पढ़ने के बाद अभिभावक अपने बच्चों को कॉलेज की पढ़ाई करने शहर नहीं भेजते हैं। कुछ छात्राएं शिक्षा का लाभ लेने से वंचित रहती हैं। कई की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती। इसी के मद्देनजर विवि में छात्राओं को रहने, खाने-पीने की सुविधाएं दी जा रही हैं। शुल्क बिल्कुल कम है। छात्राओं को भी संस्कृत का ज्ञान प्राप्त करने का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि कोविड समाप्त होते ही बीएड के छात्र स्कूलों में जाकर बच्चों को संस्कृत कोर्स करवाएंगे।
बढ़ाई जाएंगी 11वीं की 100 सीटें
इस बार विवि में 11वीं कक्षा की 60 सीटें बढ़ाकर 100 की जाएंगी। विवि ने इसकी मंजूरी ले ली है। लिखित परीक्षा के आधार पर प्रवेश मिलेगा।