एमए स्टेडियम में बन रही क्लाइंबिंग वॉल का इंफोग्राफिक
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क्लाइंबिंग को ओलंपिक में भी जगह मिल चुकी है। इसे देखते हुए एमए स्टेडियम जम्मू में अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहली क्लाइंबिंग वॉल का निर्माण किया जा रहा है। इससे जहां क्लाइंबिंग से जुड़े खिलाड़ियों को फायदा मिलेगा वहीं, ओलंपिक के लिए खिलाड़ी भी निकलेंगे। यह जम्मू-कश्मीर की पहली अंतरराष्ट्रीय स्तर की क्लाइंबिंग वॉल है। इस परियोजना पर चार करोड़ खर्च होंगे। निर्माण कंपनी की ओर से छह माह में क्लाइंबिंग वॉल तैयार करने का दावा किया गया है।
इसके बनने से प्रदेश के खेल ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। वॉल के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्लाइंबिंग को ओलंपिक में जगह मिलने के बाद इस वॉल का महत्व काफी बढ़ गया है। क्लाइंबिंग एक आधुनिक खेल है, जो पारंपरिक रॉक क्लाइंबिंग से उत्पन्न हुआ है। इसके तहत तीन प्रतियोगिताएं होती हैं, जिनके लिए दो वॉल तैयार की जाएंगी। (संवाद)
ऐसी बनेगी क्लाइंबिंग वॉल
क्लाइंबिंग के लिए लीड, स्पीड और बोल्डर तीन तरह की वॉल तैयार की जाएंगी। साथ ही अभ्यास के लिए भी एक वॉल का निर्माण किया जाएगा। लीड और स्पीड वाॅल 15-15 मीटर और बोल्डर वाॅल साढ़े चार मीटर ऊंची होगी। अभ्यास वॉल की ऊंचाई आठ मीटर होगी। वाॅल इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग के मानकों के अनुरूप 15 मीटर ऊंची होगी। क्लाइंबिंग वाॅल बनाने का जिम्मा मेरठ की कंपनी एआरएस एक्सपोर्ट को दिया गया है। दावा है कि छह माह में वाॅल तैयार हो जाएगी। क्लाइंबिंग के तहत तीन प्रतियोगिताएं लीड, बोल्डरिंग और स्पीड शामिल हैं। ओलंपिक सहित अन्य बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए युवाओं को तैयार किया जाएगा।
अब युवा खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए नहीं जाना पड़ेगा अन्य राज्य में- एथलीट शिवानी चाढ़क
जम्मू निवासी एवं क्लाइंबिंग में एशियाई स्तर की मेडल विजेता एथलीट शिवानी चाढ़क ने बताया कि क्लाइंबिंग के लिए जो नया प्लेटफार्म तैयार किया जा रहा है वह प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए नया आयाम साबित होगा। इससे बच्चों को बहुत ज्यादा लाभ होगा। अब बच्चों को पढ़ाई छोड़कर अभ्यास के लिए अन्य राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जम्मू में पुरानी क्लाइंबिंग वॉल काफी छोटी है। नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उस पर अभ्यास नहीं कर सकते। नई क्लाइंबिंग वॉल पर अभ्यास करने से प्रदर्शन में काफी सुधार होगा।
जम्मू में वॉल बनने से क्लाइंबिंग में युवाओं की रुचि बढ़ेगी। उम्मीद है कि वॉल के निर्माण के बाद दो-तीन साल में नेशनल चैंपियनशिप जीत सकते हैं। दूसरा सबसे बढ़ा फायदा क्लाइंबिंग के लिए अब बच्चों को बाहर नहीं भेजना पड़ेगा। इससे समय और पैसे की बचत होगी। - राम खजूरिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, जम्मू-कश्मीर पर्वतारोहण संघ।