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पीडीपी को नेकां का समर्थन, उमर ने राज्यपाल को सौंपा पत्र

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रियासत में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद तेजी से बदल रहे घटनाक्रम के तहत मंगलवार को नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने राजनीतिक अस्थिरता खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पीडीपी को बिना शर्त समर्थन देने का पत्र राज्यपाल एनएन वोहरा को सौंपा है।
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साथ ही यह आग्रह किया है कि पिछले तीन सप्ताह से चल रहे गतिरोध को तोड़ने के लिए सबसे बड़ी पार्टी पीडीपी को आमंत्रित किया जाना चाहिए। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि नई सरकार के बाबत कोई भी फैसला लेने से पहले नेकां को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

नेकां के कदम के बाद रियासत में सियासी हलचल काफी तेज हो गई। सरकार बनाने में जुटी पीडीपी और भाजपा दोनों सक्रिय हो गई। सूत्रों ने बताया कि नेकां का समर्थन पत्र औपचारिक रूप से राजभवन पहुंचने के बाद पीडीपी ने भी संभावित समीकरणों पर विचार करना शुरू कर दिया है।
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गठबंधन के फायदे-नुकसान

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस गठबंधन के फायदा-नुकसान पर विचार किया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर पार्टी फोरम पर औपचारिक बैठक के बाद ही कोई फैसला किया जा सकता है।

उधर, पिछले तीन सप्ताह से सरकार गठन की कोशिशों में जुटी पीडीपी ने अपने विधायकों और क्षेत्र के लोगों से भाजपा के साथ सरकार बनाने के विकल्प पर राय मशविरा भी किया था। ज्यादातर लोगों की राय इस गठजोड़ के पक्ष में नहीं थी।  

सोमवार को नेकां कोर कमेटी की बैठक में सदस्यों ने सरकार बनाने के लिए भाजपा से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। कमेटी ने पीडीपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया था।

इसके बाद मंगलवार को दोपहर बाद नेकां के जम्मू संभाग के प्रधान देवेंद्र सिंह राणा ने राजभवन पहुंचकर पार्टी का समर्थन संबंधी पत्र सौंपा।
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राज्यपाल ने गृह मंत्रालय को दी जानकारी

उधर, नेकां के कदम के बाद राजभवन ने भी ताजा हालात की जानकारी गृह मंत्रालय को दे दी है। सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल नेकां के कदम के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद ही कोई कदम उठाएंगे। इसमें सरकार गठन के ठोस फार्मूले का परीक्षण तथा कानूनी राय शामिल है।

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिसमें विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन पर चर्चा हुई।

इस दौरान पार्टी के कई नेताओं ने पीडीपी को विधिवत एक पत्र लिखने और बिना शर्त समर्थन देने का प्रस्ताव रखा। कई नेताओं ने इसका विरोध भी किया।

लेकिन बाद में फिर कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पीडीपी को लिखने के बजाए पत्र राज्यपाल को लिखकर भेजना चाहिए और उन्हें सरकार गठन के लिए पीडीपी को समर्थन देने की बात से अवगत करवाना चाहिए।
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