सैन्य सप्लाई में शामिल दूध की एक लीटर पैकिंग के कार्टन अब रिसाइकिल होंगे। पुंछ जिले के अग्रिम इलाकों में तैनात सेना को रोजाना 12 लाख पैकेट सप्लाई किए जाते हैं। एक लीटर के पैक दूध इस्तेमाल के बाद कचरे में शामिल हो जाते हैं, जिसे सामान्य इकाई में रिसाइकिल नहीं किया जा सकता।
पुंछ के खनेत्तर नाला क्षेत्र में कॉस्मो फाउंडेशन ने सेना के लिए विशेष इकाई पर काम शुरू कर दिया है। इससे सैन्य सप्लाई और इस्तेमाल से जुड़े कचरे का निस्तारण कर उसे रिसाइकिल किया जाएगा, जो सामग्री पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है। कंपनी प्रवक्ता ने बताया कि खनेत्तर में इकाई शुरू होने से रोजाना 12 लाख पैकेट को रिसाइकिल किया जाएगा।
सामान्य स्थिति में यह पैकेट किसी भी जगह एकत्रित होकर पर्यावरण, जल और मिट्टी को दूषित करते हैं। उन्होंने बताया कि सेना की तैनाती दूरदराज इलाकों में है। ऐसे जगहों पर ताजा दूध की सप्लाई नहीं हो पाती। ऐसे में टेट्रा पैक में ही दूध की आपूर्ति होती है।
कॉस्मो फाउंडेशन की मैनेजिंग ट्रस्टी यामिनी जयपुरिया ने कहा कि दूध पैक के कार्टन रिसाइकिल करने के लिए विशेष रिसाइकिल प्लांट की जरूरत होती है। रिसाइकिल न करने पर यह कार्टन स्थानीय जलस्रोतों समेत मिट्टी को भी दूषित करते हैं।
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पुंछ में इकाई स्थापित करने के बाद कश्मीर घाटी में भी इस तरह के प्रयास किए जाएंगे। एस ऑफ स्पेड्स डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल राजीव पुरी ने इकाई का उद्घाटन कर कहा कि फाउंडेशन की मदद से सेना पर्यावरण के प्रति और बेहतर कार्य कर सकेगी।
कार्टन की छोटी गोलियां बनाकर देहरादून में की जाएगी रिसाइकिलिंग
फाउंडेशन प्रवक्ता ने बताया कि पुंछ में स्थापित इकाई में कार्टन के टुकड़े कर छोटी गोलियां बनाई जाएंगी। फिर इसे उत्तराखंड में देहरादून के नजदीक खतिमा इकाई में ले जाकर पूरी रिसाइकिलिंग प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।