उद्योग विभाग ने केंद्र से पुराने के साथ नए विस्तारित पैकेज में कुल 75000 (पहले बजट के अलावा अतिरिक्त 46600 करोड़) करोड़ रुपये की मांग की है। उद्योग विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार पर सबकी नजरें टिकीं हुईं हैं। मुख्यमंत्री ने भी नई दिल्ली से औद्योगिक पैकेज के विस्तार की मांग की है। गत दिवस कन्वेंशन सेंटर में हुई पांचवीं निवेशक बैठक में भी निवेशकों ने प्रमुख रूप से नई केंद्रीय औद्योगिक क्षेत्र योजना पैकेज के साथ बजटीय परिव्यय बढ़ाने पर जोर दिया था।यंत्र और मशीनरी पर 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश भी रुका
बताया जाता है कि पोर्टल बंद होने से पहले आवेदन प्रस्तावों में निवेशक करीब 10 हजार करोड़ रुपये के संयंत्र और मशीनरी लगाने वाले थे। लेकिन वे रुक गए हैं। निवेशक लगातार नई केंद्रीय औद्योगिक क्षेत्र योजना पैकेज के साथ बजटीय परिव्यय को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसी तरह करीब 30 हजार करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पर संशय बना है।
शासन बदलने से भी परिस्थितियां बदलींजम्मू कश्मीर में जिस समय नई औद्योगिक नीति लाई गई थी, उस समय उपराज्यपाल प्रशासन सभी प्रमुख क्षेत्रों को देख रहे थे। लेकिन उमर सरकार के बनने के बाद उद्योग, वित्त विभाग मंत्रियों के हाथों चले गए हैं। लेकिन पैकेज विस्तार की चाबी केंद्र के पास ही है।
केंद्र नजरें इनायत करे या फिर जम्मू कश्मीर सरकार अपने हाथ में ले
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन जम्मू के प्रधान ललित महाजन का कहना है कि हम लगातार नई औद्योगिक पैकेज के विस्तार की मांग कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में केंद्र सरकार को बजट का विस्तार करना चाहिए या फिर जम्मू कश्मीर सरकार को इस कार्य को अपने हाथ में लेकर जरूरी स्रोत जुटाने चाहिए। पैकेज के विस्तार में नई औद्योगिक इकाइयों के साथ मौजूदा इकाइयों का प्रोत्साहन बढ़ाने पर काम किया जाना चाहिए। मौजूदा इकाइयों को भी नई इकाइयों की तर्ज पर सभी तरह का प्रोत्साहन देकर मजबूत बनाया जाए।