सरकार ने वित्तीय लेखा सहायक (एफएए) और जलशक्ति व पीडब्ल्यूडी विभाग की कनिष्ठ अभियंता (जेई )सिविल भर्ती को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश की गई है। सरकार ने यह भी कहा है कि भर्ती में धांधली के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। नए सिरे से जल्द ही भर्ती भी होगी।
इस प्रकरण में भी पुलिस उप निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की तरह धांधली के आरोप लगे थे। एसआई परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया था। अमर उजाला ने 20 अगस्त को ही वित्तीय लेखा सहायक और जेई सिविल की चयन सूची रद्द करने की सिफारिश करने की खबर प्रकाशित की थी।
एफएए और जेई दोनों भर्तियों में धांधली की शिकायत के बाद गृह सचिव आरके गोयल के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय टीम ने पूरे प्रकरण की जांच की थी। जांच में पाया कि इन दोनों भर्तियों में भी सब इंस्पेक्टरों की भर्ती की तर्ज पर जमकर धांधली हुई।
समिति ने एफएए के लिए चुने गए 972 उम्मीदवारों और जेई सिविल के लिए चुने गए 209 उम्मीदवारों की चयन सूची को रद्द करने की सिफारिश समिति ने की थी। समिति ने उपराज्यपाल को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा कि इन परीक्षाओं में न सिर्फ अयोग्य उम्मीदवारों का चयन हुआ है बल्कि पेपर भी लीक किया गया।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इन भर्तियों के लिए परीक्षा कराने वाली एजेंसी ने एसएसबी के अफसरों, कर्मियों और कुछ निजी लोगों के साथ मिलकर पेपर लीक किया। उम्मीदवारों से कहा गया कि तीनों भर्तियों में से किसमें चयनित होना चाहते हैं।
तीनों के लिए अलग अलग दाम तय किए गए। सब इंस्पेक्टरों के लिए 20 से 25 लाख, एफएए के लिए 13 से 16 लाख और जेई सिविल के लिए 10 लाख तक की बात की गई। इस गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल हैं और कैसे इसे अंजाम दिया गया, इसकी सीबीआई से जांच कराएं।
इस जांच समिति में गोयल के अलावा कानून विभाग के सचिव अचल सेठी और सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के सचिव मनोज द्विवेदी भी शामिल थे। सरकार इन तीनों भर्तियों को संपन्न कराने वाले जम्मू-कश्मीर सेलेक्शन बोर्ड (जेकेएसएसबी) के छह सचिव स्तर के अफसरों से लेकर चेयरमैन तक बदल दिए थे।
छह मार्च को हुई थी एफएए की परीक्षा
सब इंस्पेक्टरों की भर्ती की लिखित परीक्षा 27 मार्च 2022 और एफएए की 6 मार्च को हुई थी।