कोरोना संक्रमण के दौरान नगर निगम ने स्प्रे अभियान के तहत पचास लाख से ज्यादा राशि खर्च कर दी है, लेकिन धरातल पर परिणाम सिफर है। कोरोना काल में दवाई के छिड़काव के लिए जो पंप खरीदे थे वह भी खराब निकले है। फागिंग मशीनों में भी तकनीकी खामी पाई गई। यह खरीदारी 2020 में पहले लॉकडाउन के दौरान हुई थी। इसके अलावा स्प्रे के लिए टैंकर की भी खरीद हुई थी, लेकिन उनका इस बार लॉकडाउन में भी प्रयोग नहीं हो पाया है। यह मामला जनरल हाउस में भी गरमाया रहा है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार दोनों लाकडाउन में पचास लाख से ज्यादा खर्च मशीनरी, स्प्रे और द वाई पर किया गया है। इस साल हुए लॉकडाउन के दौरान स्प्रे अभियान ऐसे इलाकों में चला, जहां पर मरीजों की पहचान हो रही थी। हालांकि पहले लॉकडाउन में गलियों और सड़कों में दवा छिड़काव अभियान जोरशोर से चला था, लेकिन बाद में इसकी गति मंद हो गई। इस दौरान पार्षदों की ओर से बवाल किया गया। जनरल हाउस की बैठकों में मसलों गरमाया रहा। इस पर अधिकारी स्प्रे करने का हवाल दे चुके हैं।
हर वार्ड में मिली थीं दो-दो मशीनें
जानकारी के अनुसार हर वार्ड में दो-दो फागिंग और छिड़काव मशीनें पार्षदों को मुहैया करवाई गई थीं। लेकिन कुछ वार्डों में मशीनें मुहैया नहीं हुई हैं। इस कारण निजी खर्च पर पार्षदों को मशीनें लेनी पड़ी थीं।
निजी स्तर पर पार्षदों ने करवाया स्प्रे
नगर निगम से मशीनरी नहीं मिलने पर लॉकडाउन एक और दो में पार्षदों ने अपने स्तर पर स्प्रे और फागिंग मशीनें खरीदी थीं। अपने वार्ड के अलावा अन्य वार्डों में भी दवाई का छिड़काव करवाया गया था।
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बैठकों में हर बार गरमाता है मसला
जनरल हाउस की बैठकों में हर बार पार्षदों की ओर से मसले को उठाया जाता है। इस पर तीखी बहस भी होती है। इस पर विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए थे। इस बार होने वाली बैठक में रिपोर्ट रखी जानी है।
कोरोना संक्रमण के दौरान लाखों खर्च हुए हैं। मशीनरी खरीदी गई। इस बारे में जांच करवाई जाएगी की राशि कहां पर खर्च हुई है और सामान कहां पर है। फिलहाल स्प्रे करवाया जा रहा है। लोगों को बेहतर सुविधा दी जा रही है।
- अतुल गुप्ता, सचिव, नगर निगम