इसके खिलाफ अब्दुल ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य उपभोक्ता आयोग ने पाया कि ट्रैक्टर एजेंसी ने दस्तावेजों में हेराफेरी की है। डिलीवरी चालान और अंतिम बिक्री पत्र में में ट्रैक्टर के चेसिस और इंजन का नंबर अलग-अलग है। बीमा कंपनी ने भी लापरवाही करते हुए दस्तावेजों की जांच नहीं की, जिसका खामियाजा अपीलकर्ता को भुगतना पड़ा। मामले में बीमा कंपनी को दोषी मानते हुए ब्याज सहित प्रीमियम राशि लौटाने का आदेश दिया गया है।
साथ ही ट्रैक्टर एजेंसी को अब्दुल हो हुए नुकसान को ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति के मुआवजे के रूप में 50 हजार और मुकदमेबाजी में हुए खर्चे के एवज में 25 हजार रुपये का अब्दुल को भुगतान करने का आदेश दिया है।