अपनी स्थापना 29 जुलाई, 2022 से लेकर अब तक वन स्टॉप सेंटर ऐसी ही 635 महिलाओं की मदद कर चुका है। कोई भी महिला, किसी भी समय कॉल के माध्यम से या खुद पहुंचकर अपनी शिकायत इन तक पहुंचा सकती है। 181 इनका हेल्पलाइन नंबर है और प्रीत नगर इलाके में सीआरपीएफ मुख्यालय के सामने इनका ऑफिस है। जिला समाज कल्याण अधिकारी इसके नोडल अफसर और डीसी चेयरपर्सन हैं।
काउंसलिंग भी करते हैं, जरूरत पर आश्रय भी देते हैं
वन स्टॉप सेंटर, जम्मू की केंद्र व्यवस्थापक पल्लवी शर्मा ने बताया कि सेंटर मुख्य तौर पर पीड़ित महिलाओं को उनकी जरूरत के हिसाब से पांच तरह की सुविधाएं देता है। पीड़िताओं की काउंसलिंग करता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस की सहायता उपलब्ध कराता है और कानूनी मदद भी देता है।
चिकित्सा सुविधा भी देता है और अस्थाई तौर पर उन्हें आश्रय यानी कि शेल्टर होम की सुविधा भी प्रदान करता है। यदि किसी को ज्यादा समय के लिए आश्रय चाहिए तो उन्हें सरकारी और गैर लाभकारी संगठनों (एनजीओ) के शेल्टर होम में जगह दिलवाता है। महिलाओं को समर्थ्य बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रहीं सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान करता है। वन स्टॉप सेंटर आपातकालीन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं तक भी तत्काल मदद पहुंचाता है।
घरेलू हिंसा और साइबर क्राइम की शिकायतें सबसे ज्यादापल्लवी शर्मा ने बताया कि उनके उनके पास सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा और साइबर क्राइम के आते हैं। इसके अलावा यौन उत्पीड़न, तलाक, विवाहेतर संबंध, ब्लैकमेलिंग, बाल विवाह और संपत्ति से संबंधित विवाद भी आते हैं।
ज्यादातर मामलों में उनका प्रयास होता है कि मसला बातचीत से ही हल हो जाए। फिर जैसी जरूरत होती है, उस तरह से पीड़िताओं की मदद की जाती है। साल 2024 में वन स्टॉप सेंटर ने 354 से ज्यादा महिलाओं की मदद की। इनमें से 48 महिलाओं महिलाओं को पुलिस सहायता, 39 को कानूनी सहायता, 14 को चिकित्सा सहायता, 20 को काउंसलिंग और 26 को आश्रय दिया गया। कई मामलों में वन स्टॉप सेंटर ने आपातकालीन परिस्तिथियों में फंसी महिलाओं का रेस्क्यू किया।