पहाड़ियों के बीच यहीं अवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद का जन्म हुआ। कभी नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रही इस सीट पर दो दशक से इंजीनियर रशीद का ही प्रभाव है। सरकारी नौकरी छोड़कर इंजीनियर रशीद ने 2008 में पहली बार निर्दलीय विधायक चुने गए। अब उनके भाई खुर्शीद अहमद शेख सरकारी नौकरी छोड़कर यहां से ताल ठोक रहे हैं। जमानत मिलने के बाद घाटी में प्रचार कर रहे रशीद के चलते कई सीटों के समीकरण बदल चुके हैं। उनमें उनमे एक लंगेट भी है।
- लंगेट तिराहे पर मस्जिद की ओर से आ रहे गुलफाम से मुद्दों पर चर्चा की, तो बोले-वही जो पूरे कश्मीर में है...रोजगार। युवाओं को काम मिले, बस यही इच्छा है। दुकानदार दिलशाद से चुनाव का हाल पूछा, तो मस्जिद के सामने चढ़ाई की ओर इशारा कर दिया। कहते हैं कि सब वहीं से होता है। दरअसल, चढ़ाई के उस पार पहाड़ी पर ही इंजीनियर रशीद का परिवार रहता है।
- लंगेट चौराहे पर बैठे 85 वर्षीय बुजुर्ग की टीस सामने आ गई, जब वे कहते हैं, आज तक कभी विकास होते नहीं देखा, शिक्षा नहीं देखी। इस पूरे क्षेत्र में आतंकवाद ही देखा है। मैं खुद बहकावे में आकर हड़ताल में शामिल होता रहा।
- पिछले महीने बेटा मुंबई ले गया, तो देखा कि जिंदगी क्या है, लोग कितना आगे बढ़ गए हैं। लंगेट तो बहुत पीछे है। लंगेट को शिक्षा व रोजगार की बहुत जरूरत है।
लंगेट से खुर्शीद के अलावा, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के इरफान पंडितपुरी, नेकां-कांग्रेस से इरशाद हुसैन गैनी व जमात ए इस्लामी समर्थित नेता गुलाम कादिर लोन के बेटे कलीमुल्लाह लोन निर्दलीय प्रत्याशी हैं।