जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पांडुरंग के पोले ने मतदान के बाद कई मुद्दों पर खुलकर बात की। पीके पोले ने कहा कि आतंकियों को आगे आने से रोका, लोगों ने सहयोग दिया यही बंपर वोटिंग का कारण है। शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव हुए, मतदाताओं को पर्याप्त सुरक्षा कवच दिया।
मजबूत सुरक्षा ढांचे और लोगों के भरपूर सहयोग से लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव में बंपर वोटिंग संभव हो पाई है। चुनाव में अधिक से अधिक मतदान के लिए नई पहलों के बेहतर नतीजे मिले। मतदाताओं तक अधिक पहुंच बनाई गई।
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खासतौर पर घाटी में कम मतदान वाले क्षेत्रों में रिकॉर्ड वोट प्रतिशत ने साबित कर दिया कि लोगों का लोकतंत्र में विश्वास बढ़ा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जम्मू-कश्मीर पांडुरंग के पोले से हुई अमित कुमार की बातचीत के प्रमुख अंश...
लोकसभा चुनाव के बाद बढ़ी आतंकी घटनाओं से क्या चुनौतियां रहीं?
लोकसभा चुनाव के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान ने आतंकियों की मदद से जम्मू संभाग के कुछ इलाकों को निशाना बनाकर हमले किए। उधमपुर, कठुआ, रियासी और डोडा क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। विधानसभा चुनाव में सुरक्षा की चुनौती को देखते हुए एक बेहतर योजना पर काम किया गया।
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संभावित क्षेत्रों में आतंकियों को उनके क्षेत्र में ही घेरकर रखा। निचले हिस्से में मजबूत सुरक्षा कवच बनाया। मैदानी इलाकों में छुटपुट आतंकी घटनाएं हुईं, लेकिन आतंकियों को ढेर कर दिया गया। पूरे चुनाव में अधिकांश ध्यान आतंकी संगठनों की ओर से हिंसा को रोकने पर रहा।
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कश्मीर के कम मतदान वाले क्षेत्रों में वोट प्रतिशत कैसे बढ़ाया?
कश्मीर में कई ऐसे जिले हैं, जहां वोट प्रतिशत नाममात्र रहता रहा है। ऐसे क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा के कारण रिकॉर्ड मतदान हुआ। पहले शोपियां और पुलवामा जैसे जिलों में कुछ प्रतिशत मतदान होता था, लेकिन यहां लोकसभा के बाद विधानसभा में अधिक मतदान हुआ। कुछ ऐसे इलाकों में मतदान कम हुआ है जहां 60 प्रतिशत तक रहता था, लेकिन ऐसे इलाकों में कुल मिलाकर मतदान प्रतिशत पर गिरावट का अधिक प्रभाव नहीं दिखा। उधमपुर और रियासी जैसे जिलों में सामान्य के बजाय उत्तम मतदान हुआ। जम्मू में ओवरआल पहले की तरह मतदान हुआ है। राजोरी और पुंछ में अपेक्षा से थोड़ा कम मतदान रहा।
बटन दबाने में महिलाओं के अधिक रुझान की पीछे कोई खास कारण?
महिलाएं लोकतंत्र में अधिक भागीदारी चाहती हैं। जम्मू-कश्मीर में 40 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाताओं ने अधिक मतदान किया है। विधानसभा चुनाव में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने मतदान में अधिक रुझान दिखाया, जो अच्छा संकेत है।
घर पर वोट से क्या लाभ मिला?
2019 के बाद से कोविड को देखते हुए घर पर 85 प्लस से अधिक बुजुर्गों के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। इस बार चुनाव आयोग अधिक से अधिक ऐसे मतदाताओं के घर पहुंचा जिससे वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई। इससे पहले बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता शारीरिक समस्याओं व अन्य कारणों से मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते थे। भविष्य में ऐसे विभिन्न विशेष श्रेणी वाले लोगों के लिए मतदान की और बेहतर व्यवस्थाएं की जाएंगी।
कश्मीरी विस्थापित मतदाताओं ने कितना उत्साह दिखाया
पिछले चुनावों की तुलना में कश्मीरी विस्थापित मतदाताओं ने जमकर उत्साह दिखाया है। पहले के चुनावों में इनका वोट प्रतिशत 15 से 20 रहता था। इस बार यह प्रतिशत 45 से 50 तक चला गया। विस्थापित मतदाताओं का वोट प्रतिशत बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि उनकी मतदान में भागीदारी के लिए औपचारिकताओं को सरल बनाया गया है।
पोलिंग पार्टी के लिए क्या चुनौतियां रहीं?
आतंकग्रस्त इलाकों में पोलिंग पार्टियों के लिए कई चुनैतियां थीं। इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और अन्य प्रबंध किए गए। मतदान के दौरान कहीं भी कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय और प्रशिक्षण के कारण चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से हो पाए।