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Jammu Kashmir: अमर उजाला की 19 साल की यात्रा का जश्न, आतंकवाद से विकास तक, जम्मू-कश्मीर की सफलता की कहानी

Sat, 05 Oct 2024 12:30 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : बासित जरगर
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अमर उजाला' आज जम्मू में अपनी यात्रा के 19 वर्ष पूरे कर 20वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान जम्मू-कश्मीर ने कई महत्वपूर्ण बदलावों का अनुभव किया है। तवी और झेलम की बाढ़ों से लेकर सीमापार गोलीबारी के क्षणों तक, राज्य ने हर चुनौती का सामना किया और अब एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहा है।

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इन 19 वर्षों में जम्मू-कश्मीर ने न केवल प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का भी गवाह बना। टारगेट किलिंग और पत्थरबाजी के दिनों के बाद, अब छात्रों का हाथ फिर से किताबों में है और खेल के मैदानों में दौड़ने की प्रेरणा बढ़ी है। सीमा पार से बरसने वाले गोलों की गूंज अब सुनाई नहीं देती, जबकि आतंकवाद और अलगाववाद पर कड़ा अंकुश लगा है।

राज्य ने राजनीतिक अस्थिरताओं और नई उम्मीदों का सामना किया है। 19 वर्षों में कई राज्यों की तरह यहां भी लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं। 2014 और 2024 के चुनावों ने साबित किया कि जम्मू-कश्मीर में भी लोकतंत्र का उतना ही महत्व है। शांतिपूर्ण और बंपर वोटिंग ने बदलाव की नई कहानी लिखी है।
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इस दौरान, राज्य की अर्थव्यवस्था में भी तेजी आई है। 2005-06 में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 29,920 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 2.63 लाख करोड़ होने का अनुमान है। कारोबार के नए आयाम और पर्यटन की नई ऊंचाइयों ने राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। पिछले तीन साल में दो करोड़ से अधिक पर्यटकों ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया। 2022 में अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जबकि कई दशकों से बंद पड़े मुहर्रम के जुलूस ने भी फिर से रफ्तार पकड़ी।

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इस यात्रा में राजनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक बदलावों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं। उमर अब्दुल्ला ने छह साल का कार्यकाल पूरा किया, जबकि महबूबा मुफ्ती पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। जम्मू से श्रीनगर की यात्रा अब 12-13 घंटे से घटकर 5-6 घंटे में पूरी होती है, जो राज्य के विकास की गाथा कहता है।

सड़कों के सैंकड़ों प्रोजेक्ट, टनल, स्टेडियम, पावर, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और खेती के क्षेत्रों में प्रगति इस राज्य के बदलावों की नई कहानी बयां कर रही है। स्टार्टअप के जरिए औद्योगीकरण ने युवाओं के हसरतों को पंख दिए हैं। आईआईटी, आईआईएम, एम्स और आईआईएमसी जैसे संस्थान भी इसी दौर में स्थापित हुए हैं।

अनुच्छेद 370 और 35 ए का निरस्त होना इस दौर की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी घटना रही है, जिसने जम्मू-कश्मीर के भविष्य को नई दिशा दी है। इस प्रकार, 'अमर उजाला' की यात्रा ने जम्मू-कश्मीर की नई कहानी को उजागर किया है, जहां विकास, आशा और नई संभावनाएं उभर रही हैं। 20वें वर्ष की ओर बढ़ते हुए, जम्मू-कश्मीर में संभावनाओं की एक नई यात्रा शुरू हो चुकी है।
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