1987 के चुनाव में 76 विधानसभा हलकों में भाजपा ने 29 प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें से दो को सफलता मिली थी। उसके बाद, सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद, पार्टी ने 1996 में 53, 2002 में 58, 2008 में 64 और 2014 में 75 प्रत्याशियों पर दांव लगाया। 2014 में भाजपा ने पहली बार सत्ता में आकर पीडीपी के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई, जो 2018 में गिर गई। इसके बाद, केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सीधे शासन लागू किया और अनुच्छेद 370 व 35ए को हटा दिया गया।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. हरिओम का कहना है कि भाजपा की घाटी में उतनी ताकत नहीं बढ़ी है। कश्मीरी अवाम भाजपा को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही है, जबकि जम्मू संभाग में पार्टी का जनाधार मजबूत है। चिनाब वैली और पीर पंजाल क्षेत्रों में पार्टी को विशेष चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चुनावी रणनीति के तहत, पार्टी को सत्ता में आने के लिए जम्मू संभाग में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
भाजपा ने इस बार 61 सीटों में से 24 टिकट मुस्लिम समुदाय के लोगों को दिए हैं, जो कुल टिकटों का 40 प्रतिशत है। इनमें ज्यादातर सीटें कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में हैं, जो पार्टी की सांप्रदायिक विविधता और समावेशिता की रणनीति को दर्शाता है।
पार्टी की चुनावी रणनीति का आकलन करने के लिए, पिछले चुनावों के आंकड़े
2014: 75 प्रत्याशी, 25 जीते, 40 प्रतिशत मत, 22.98 प्रतिशत वोट शेयर
2008: 64 प्रत्याशी, 11 जीते, 40 प्रतिशत मत, 12.45 प्रतिशत वोट शेयर
2002: 58 प्रत्याशी, 1 जीते, 43 प्रतिशत मत, 8.57 प्रतिशत वोट शेयर
1996: 53 प्रत्याशी, 8 जीते, 33 प्रतिशत मत, 12.13 प्रतिशत वोट शेयर
1987: 29 प्रत्याशी, 2 जीते, 20 प्रतिशत मत, 5.10 प्रतिशत वोट शेयर