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जम्मू-कश्मीर की पहली कैबिनेट बैठक: बेरोजगारी-आरक्षण और भर्ती पर अहम फैसला, जानें और कौन-कौन से हुए निर्णय

Fri, 22 Nov 2024 01:16 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट बैठक में बेरोजगारी, आरक्षण, और भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए उप-समिति बनाने का निर्णय लिया गया।

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उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर - फोटो : X / @OmarAbdullah
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विस्तार
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जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज जम्मू स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में राज्य के विभिन्न मुद्दों और विकासात्मक योजनाओं पर चर्चा की गई। 

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जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को जम्मू में अपनी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें रोजगार, आरक्षण और भर्ती प्रक्रियाओं सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और कई दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में जम्मू और कश्मीर में सरकारी नौकरियों में आरक्षण सीमा को संशोधित करने की बढ़ती मांग पर विचार किया गया और इस मुद्दे पर सभी हितधारकों के साथ संवाद करने के लिए एक उप-समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

उपमुख्यमंत्री सुंदरी कुमार चौधरी अन्य मंत्री और मुख्य सचिव अतल दुल्लू भी बैठक में शामिल हुए। यह बैठक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार के कार्यकाल में अब तक की दूसरी बैठक थी। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए जल शक्ति और वन मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि बैठक में रोजगार, आरक्षण, भर्ती प्रक्रियाओं और विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। आज हम मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की। हमने माननीय उपराज्यपाल के विधानसभा में दिए गए भाषण की चर्चा की और उसे मंजूरी दी। बैठक में किए गए सभी निर्णयों को उचित समय पर सार्वजनिक किया जाएगा।

उन्होने कहा कि विधानसभा सत्र में उपराज्यपाल के भाषण में उल्लेखित हर महत्वपूर्ण पहलू को बैठक में शामिल किया गया है। रोजगार को लेकर उठे सवालों के जवाब में राणा ने कहा मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने विभागों में बेरोजगारी के मुद्दे को प्राथमिकता दें और इसे हल करने के लिए कार्यवाही शुरू करें। हम अपनी 100 दिन की योजना के तहत अगले दो महीनों में ठोस उपाय पेश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।बेरोजगारी का समाधान चुनावी घोषणापत्र का महत्वपूर्ण वादा है और सरकार इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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विभागों में खाली पदों को भरने के बारे में राणा ने कहा कि बैठक में यह विचार किया गया कि क्या इन पदों को सार्वजनिक सेवा आयोग (पीएससी) या जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (एसएसआरबी) को सौंपा जाए। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इन पदों के लिए विज्ञापन निश्चित समय सीमा में जारी किए जाएं।

हमारा चुनावी घोषणापत्र अब केवल एक वादा नहीं है, बल्कि यह अब एक सरकारी दस्तावेज है। चाहे गैस सिलेंडरों की आपूर्ति हो या अन्य कल्याणकारी उपाय, मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे इसे पूरी तत्परता और ईमानदारी से लागू करने के लिए विभागीय कार्रवाई शुरू करें।

आरक्षण नीति के (समायोजन) के बारे में पूछे गए सवाल पर राणा ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री ने एक उप-समिति गठित करने का निर्णय लिया है, जो सभी हितधारकों के साथ संवाद करेगी। इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय जनता के हित में होगा। बेरोजगार युवाओं में असंतोष तब बढ़ा जब जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (जेकेपीएससी) ने स्कूल लेक्चरर्स के 575 पदों की विज्ञप्ति जारी की जिनमें से केवल 238 पद सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए थे जबकि 337 पद आरक्षित श्रेणियों के लिए थे।

दैनिक वेतन भोगियों के मुद्दे पर राणा ने कहा कि इस पर भी चर्चा हुई और कैबिनेट ने सरकार से इस मामले को शीघ्र हल करने के लिए निर्देश दिए। दैनिक वेतन भोगियों का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पहले ही मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस दिशा में कार्यवाही शुरू करें। राणा ने सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि वह अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।
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