जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत 70 हजार डेलीवेजरों को नियमित करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही भूमि दानदाताओं (लैंड डोनर) तथा आईटीआई व पॉलीटेक्निक में काम कर रहे अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण की भी संस्तुति की गई है।
यह सिफारिशें भाजपा की ओर से गठित कमेटी ने जम्मू और कश्मीर संभाग का दौरा व विभिन्न विभागों के कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर तैयार रिपोर्ट में की हैं। इस रिपोर्ट को सोमवार गृह मंत्री अमित शाह को भी सौंपा गया है। उप राज्यपाल को भी अगले कुछ दिनों में यह रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि प्रदेश प्रशासन इस दिशा में कुछ सकारात्मक फैसला ले सकता है। इन सिफारिशों पर विचार करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में 26 जनवरी 1994 को डेलीवेजरों की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई। इसके बाद केंद्र सरकार की विभिन्न स्कीम के तहत मैनपावर की कमी आने लगी। इस नियम में बदलाव किए बिना मैनपावर की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों में कैजुअल तथा सीजनल वर्कर लगाना शुरू कर दिया गया। 1997 तक इन कर्मियों की संख्या 70 हजार तक पहुंच गई।
2009 में प्रदेश सरकार की सब कमेटी गठित की गई ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके, लेकिन इस कमेटी ने रिपोर्ट नहीं सौंपी। इसके बाद अक्तूबर 2014 में कांग्रेस तथा नेकां की सरकार के समय सब कमेटी बनाई गई। इसने 10-10 साल की सेवा पूरी करने वालों को नियमित करने की सिफारिश की, लेकिन चुनाव के बाद सत्ता में दोनों पार्टियां नहीं लौट पाईं। 2017 में पीडीपी-भाजपा की सरकार ने ऐसे कर्मियों का नामकरण सरकारी सेवा सहायक करने और मानदेय बढ़ाने की सिफारिश की।
इसके तहत 10-15 साल की सेवा पूरी करने वालों को प्रति महीने 15 हजार, 15-20 साल वालों को 17 हजार और 20 साल से अधिक सेवा करने वालों को 20 हजार मानदेय देने की सिफारिश की। भाजपा ने विस्तृत बातचीत के आधार पर रिपोर्ट में सिफारिश की है कि कैजुअल तथा सीजनल वर्कर के रूप में भले ही ये कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन काम डेलीवेजर के रूप में कर रहे हैं। इस वजह से इन्हें नियमित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही विभिन्न परियोजनाओं के लिए एक-एक कनाल तक जमीन दान करने वालों (लैंड डोनर), आईटीआई व पॉलीटेक्निक कॉलेजों में कार्यरत कर्मियों को भी नियमित किया जाए। ज्ञात हो कि पिछले सितंबर में भाजपा ने पूर्व मंत्री शामलाल की अध्यक्षता में समिति बनाई थी। इसमें पार्टी प्रवक्ता व एडवोकेट अभिनव शर्मा, पूर्व मंत्री शक्ति परिहार, शाम चौधरी व बलवंत सिंह मनकोटिया थे।
रहबर-ए-खेल, जंगलात व अन्य कर्मियों के मसले भी होंगे हल
भाजपा ने रहबर-ए-खेल, रहबर-ए-जंगलात तथा अन्य कर्मियों के मसले पर विचार के लिए भी कमेटी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौंप दी है। समिति के अध्यक्ष पूर्व उप मुख्यमंत्री कवींद्र गुप्ता, पूर्व मंत्री प्रिया सेठी व आरएस पठानिया रहे।