जम्मू कश्मीर के बीस जिलों में साढ़े चार साल बाद व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। सभी जिलों में जिला मजिस्ट्रेट नियमानुसार
योग्य लोगों को शस्त्र लाइसेंस जारी कर सकते हैं। एक नई शर्त के मुताबिक जिलाधिकारियों को व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन पर विचार करते समय आधार कार्ड लेना जरूरी होगा।
इसके अलावा प्रदेश में सिर्फ संबंधित जिले के निवासी को लाइसेंस जारी किया जाएगा। किसी आवेदक निवास क्षेत्र का पता लगाने के लिए पुलिस से एक विशिष्ट रिपोर्ट ली जाएगी। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट लाइसेंस जारी करेंगे। पुलिस सत्यापन आदि प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
गृह विभाग के वित्त आयुक्त व अतिरिक्त मुख्य सचिव राज कुमार गोयल की ओर से जारी एक आदेश में 12 जुलाई 2018 के तहत शस्त्र लाइसेंस पर लगे प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। जिला मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण व अन्य शस्त्र सेवा संबंधी मामलों के लिए आवेदन आनलाइन मोड पर लाइसेंसिंग पोर्टल एनडीएएल-एएलआईएस के माध्यम से लिया जाएगा।
इस लाइसेंस प्रक्रिया के लिए लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। प्रतिबंध हटने से बड़ी संख्या में लोग आवेदन करेंगे। इससे पुलिस और प्रशासन पर फाइलों का लोड बढ़ेगा। नई शर्तों में पहचान पत्र से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। इसमें शस्त्र अधिनियम 1959 और शस्त्र नियम 2016 के तहत व्यक्तिगत शस्त्र लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
वर्ष 2012 से 2016 के बीच जम्मू कश्मीर में बड़े पैमाने पर करीब तीन लाख के करीब फर्जी तरीके से गन लाइसेंस जारी किए गए थे। इससे बहुत से लोग लाइसेंस बनवाकर दूसरे राज्यों में चले गए थे और बाहर से लोगों ने जम्मू कश्मीर में आकर लाइसेंस बनवा लिए थे। इसमें सतर्कता विभाग के बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को मामला सौंपा गया। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच में पाया था कि सरकारी अधिकारियों ने शस्त्र विक्रेताओं से कमीशन के लालच में नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर बंदूक के लाइसेंस जारी किए हैं।
इस पूरे प्रकरण में करीब 40 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई द्वारा गन लाइसेंस मामले में अगस्त 2018 को दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर मनी लांड्रिंग का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर रखी है। इस घोटाले में अयोग्य लोगों को गन लाइसेंस जारी किए गए। सीबीआई भी अलग से कार्रवाई कर रही है।
सीबीआई ने वर्ष 2021 में उपराज्यपाल के एक पूर्व सलाहकार के आवास समेत देशभर में 41 ठिकानों पर छापा मारा था। इसमें कई डीएम सहित नौकरशाह और प्रशासकों के परिसर में दबिश दी गई थी। 2017 में राजस्थान आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने फर्जी लाइसेंस जारी करने को लेकर खुलासा किया था और फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस जारी करने के आरोप में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था।