चिनाब क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस ने नए चेहरे उतारे हैं। यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद है। भाजपा को निर्दलीय उतरे अपने से चुनौती हैं। नेकां -कांग्रेस को गठबंधन से उम्मीद है।
पहले चरण की 24 सीटों में रामबन विस क्षेत्र में मुस्लिम और हिंदू आबादी में केवल 15 फीसदी का अंतर है। यहां बहने वाली चिनाब जितनी अशांत है, उसके उलट यहां के लोग बेहद शांत हैं। यहां किसी भी चुनाव में धर्म मुद्दा नहीं रहा। न ही धर्म के नाम पर विवाद। वर्ष 2008 और 2014 के चुनाव को छोड़कर नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़ रही इस सीट से सभी चेहरे हिंदू हैं।
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पार्टी चाहे मुस्लिम मुद्दों पर केंद्रित हो या फिर कम्युनिस्ट विचाराधारा की, इस सीट का इतिहास रहा है कि यहां अधिकतर हिंदू चेहरे ही उम्मीदवार के रूप में उतरते हैं। इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला नजर आता है। भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने नये चेहरों को मौका दिया है।
भाजपा से अलग होकर स्वतंत्र चुनाव लड़ रहे सूरज सिंह परिहार वोट काटने का काम कर सकते हैं। ज्यादातर उम्मीदवार राजपूत बिरादरी से होने के चलते राजपूत वोट बंटने की संभावना है। यहां की 41 फीसदी हिंदू आबादी में लगभग आधे राजपूत हैं।
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रामबन के राजनीतिक इतिहास में नेकां ने चार बार क्षेत्र का नेतृत्व किया है। भाजपा को 1996 और 2014 में दो बार सफलता मिली। इस बार भाजपा ने पूर्व विधायक नीलम लंगेह के स्थान पर राकेश सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है।
भाजपा के लिए परेशानी पार्टी से नाराज होकर उतरे सूरज सिंह से है। भाजपा के प्रत्याशी डीडीसी सदस्य रहे हैं, तो बागी सूरज सिंह भाजपा के जिला उपाध्यक्ष। भाजपा को यहां बागी को साधना चुनौती रहेगा।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने रामबन से 2014 में नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग चुनाव लड़ा था। इस बार दोनों में गठबंधन है। नेकां प्रत्याशी डॉ. चमन लाल ने 19985 वोट प्राप्त किए थे, तो कांग्रेस के अशोक कुमार को 5643 वोट मिले थे। भाजपा के नीलम लंगेह 25349 वोट लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस और नेकां इस बार मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। यह भाजपा के लिए कहीं एक चिंता का कारण जरूर है।
पांच स्वतंत्र सहित आठ उम्मीदारों की दावेदारी
विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रामबन सीट के लिए 18 सितंबर को मतदान होना है। विधानसभा क्षेत्र से 14 लोगों ने नामांकन पत्र जमा किए थे लेकिन दो त्रुटियों के चलते रद्द कर दिए गए। चार ने नामांकन वापस ले लिया। अब मैदान में पांच स्वतंत्र उम्मीदवारों सहित आठ लोग मैदान में हैं।
त्रिकोणीय मुकाबले में सेंध लगाने के लिए शिव सेना उद्धव ठाकरे के तिलक राज सहित चार अन्य आजाद उम्मीदवार भी मैदान में हैं। पैंथर्स पार्टी भीम और गुमाम नबी आजाद की पार्टी डीपीएपी के उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले चुके हैं।
धर्म से उठकर जनसुविधाओं पर मिलता है वोट
जनगणना 2011 के मुताबिक रामबन में 56.7 प्रतिशत मुस्लिम जबकि 41.46 प्रतिशत हिंदू आबादी है। राजनीति के इतिहास में यहां धर्म के नाम पर कभी भी जीत हार तय नहीं हुई है। स्थानीय निवासी किशोर कुमार, राम दास, शक्ति शर्मा, बशीर अहमद का कहना है कि रामबन जिला हमेशा आपसी भाइचारे और सौहार्द का प्रतीक रहा है। ऐसे में क्षेत्र में कभी भी राजनीतिक के क्षेत्र में धर्म को लेकर मतभेद पैदा नहीं हुआ। चुनावों में जनता क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर ही वोट करती है।
पिछले दस साल में क्या मिला
- रामबन में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे संपर्क मार्ग बेहतर हुआ
- संगलदान तक ट्रेन पहुंची
- शहर में फ्लाइओवर बना
क्या खोया
- डलवास में 2020 में लोगों की 300 एकड़ भूमि बही
- 40 परिवार बेघर हो गए
- 2024 में परनोत में बरसात से 100 घर प्रभावित हुए
- 30 से अधिक घर जमींदोज हो गए
ये हैं चुनावी मुद्दे
- डलवास और परनोत पीड़ितों काे पुर्नवास और उचित मुआवजा
- जिला मुख्यालय रामबन में जीएमसी की मांग
- जिला अस्पताल में बंद पड़े ट्रामा सेंटर का संचालन