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Jammu Election: भद्रवाह में जब-जब वोट बरसे... तब-तब विधायकी के लिए बढ़ी प्रतिस्पर्धा; जीत का अंतर भी रहा काम

Mon, 26 Aug 2024 01:51 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

भद्रवाह में जब-जब वोट बरसे हैं तब-तब विधायकी के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। जीत का अंतर भी काम रहा है। 1962 से कांग्रेस के सबसे ज्यादा छह विधायक इस सीट से जीते हैं।
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Jammu Election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू संभाग के चिनाब वेली क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण सीटों में एक भद्रवाह विधानसभा सीट है। 1962 में अस्तित्व में आई इस सीट पर जब- जब मतदाता पोलिंग बूथों पर पहुंचे जब उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर भी कम रहा है। 1983 में 65.54 फीसदी मतदान हुआ था तो जीत का अंतर 2.7 फीसदी था, 2014 में 69.25 फीसदी मतदान हुआ था तो जीत का अंतर 2.5 फीसदी रहा था। 1996 में 66.73 फीसदी मतदान हुआ था तो जीत का अंतर 10.32 फीसदी था।
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भद्रवाह विधानसभा क्षेत्र में अभी तक दस विधायक विधानसभा पहुंचे हैं। इसमें सबसे ज्यादा कांग्रेस के छह विधायक जीते हैं। जबकि नेशनल कांफ्रेंस, जनता पार्टी,बहुजन समाज पार्टी और भाजपा ने एक-एक विधायक रहा है। 1962 में पहली बार हुए चुनावों में इस सीट से नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार चुनी लाल विधायक बने थे। 

इसके बाद साल 1967 के चुनावों में कांग्रेस के जे राम ने जीते। 1972 के चुनावों में कांग्रेस के बोधराज जीते। उन्हें 65. 28 फीसदी रिकॉर्ड वोट मिले (जो किसी भी उम्मीदवार को मिला अब तक का सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत है)। इस चुनाव में सिर्फ 34.82 फीसदी मतदान हुआ था। देश में कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश और जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रिय के चलते 1977 के चुनावों में जनता पार्टी के उम्मीदवार नारायण दास ने इस सीट को जीता। 
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1983 कांग्रेस उम्मीदवार हरि लाल हितैषी जीते। 1987 में कांग्रेस उम्मीदवार हरि लाल थे। इस चुनाव में पहली बार भाजपा ने इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतारा था, जिसे 1.57 फीसदी वोट मिला था। 1996 के चुनावों में लोगों ने बहुजन समाज पार्टी ( बीएसपी) को समर्थन दिया। पार्टी उम्मीदवार अब्दुल्ल रहमान को विधायक चुना। 

इस चुनाव में 66.73 फीसदी मतदान हुआ, जो इस सीट पर दूसरे सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत था। बीएसपी उम्मीदवार को 51.32 फीसदी वोट मिला था। जबकि 40.91 फीसदी वोट हासिल कर भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। 2002 के चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर जीत हासिल की। 

 

पीडीपी पहली बार इस सीट से चुनाव मैदान में थी और सिर्फ 3.2 फीसदी वोट ही ले सकी। 2014 के चुनावों में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर जीत हासिल की। पार्टी उम्मीदवार दलीप सिंह परिहार 35.33 फीसदी वोट हासिल कर विधायक बने थे। इस चुनावों में अबतक तक का सबसे ज्यादा 69.25 फीसदी मतदान हुआ था।

2008 में गुलाम नबी आजाद को मिला 65.31 फीसदी वोट
2008 के चुनावों में कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम बनाने वाले गुलाम नबी आजाद ने इस सीट से चुनावी मैदान में उतारा। उन्होंने इस चुनावों में रिकॉर्ड 62.86 फीसदी वोट हासिल किया (जो इस सीट से किसी उम्मीदवार को मिला दूसरा सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत था)। गुलाम बनी आजाद की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की इस चुनाव में 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे जिसमें से 12 की जमानत जब्त हुई थी। इस चुनाव में 65.31 फीसदी वोटिंग हुई थी।

दो चुनावों में हार-जीत का अंतर सिर्फ दो फीसदी था
भद्रवाह विधानसभा सीट पर दो चुनावों में जीत का अंतर दो फीसदी रहा था। 1983 में हुए चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार हरि लाल हितैषी ने नेशनल कांफ्रेंस उम्मीदवार बोध राज को 2.7 फीसदी वोट से हराया था। जबकि 2014 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार दलीप सिंह परिहार ने कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद शरीफ नियाज को 2.5 फीसदी यानी 1496 वोट के अंतर से हराया था। कुल 73124 वोटों में से भाजपा उम्मीदवार को 25953 वोट मिला था जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 24457 वोट मिला था।
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2024 के चुनाव में इस सीट पर पहले चरण में मतदान है। इस सीट में कुल 1,24,568 मतदाता हैं। इसमें 63944 पुरुष, 600618 महिलाएं और छह थर्ड जेंडर मतदाता है।
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