जम्मू-कश्मीर में तीन मुख्यमंत्री चुनाव मैदान से दूर है। पहली बार बड़ा महिला चेहरा भी नहीं है। महबूबा मुफ्ती, गुलाम नबी आजाद और डॉ. फारुख अब्दुल्ला इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।
जम्मू-कश्मीर में दस साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव में तीन पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव मैदान से दूर हैं। ऐसे पहली बार है कि तीन बड़े नेता विधानसभा चुनाव का हिस्सा नहीं हैं। महबूबा मुफ्ती के चुनाव न लड़ने से कोई बड़ा महिला चेहरा भी मैदान में नहीं है।
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तीन बार के मुख्यमंत्री डॉ. फारुख अब्दुल्ला के साथ गुलाम नबी आजाद और महबूबा मुफ्ती ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है। जम्मू-कश्मीर के तीन बार के मुख्यमंत्री लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ने का फैसला ले चुके हैं।
नेकां-कांग्रेस गठबंधन को अमली जामा पहनाने में डॉ. फारूख अब्दुल्ला ने सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन खुद चुनाव लड़ने से दूरी बनाई। वहीं दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट से विधायक रहीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है।
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पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं महबूबा
महबूबा मुफ्ती 2016 में प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं। उन्होंने बिजबिहाड़ा से अपने राजनीति कैरियर की विधायक के रूप में 1996 से शुरूआत की। इस सीट से इस बार उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती चुनाव मैदान में हैं।
2008 में भद्रवाह से विधायक रहे और फिर मुख्यमंत्री बने गुलाम नबी आजाद भी इस बार चुनाव मैदान में नहीं हैं। 2008 में भद्रवाह सीट से चुनाव लड़े गुलाम नबी आजाद ने रिकॉर्ड 62.86 फीसदी वोट हासिल किए थे। आजाद की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव में 13 उम्मीदवार थे, जिनमें से 12 की जमानत जब्त हो गई थी।
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगीः महबूबा
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। अगर वह मुख्यमंत्री बन भी गईं तो केंद्र शासित प्रदेश में अपनी पार्टी के एजेंडे को पूरा नहीं कर पाएंगी। 2016 में मुख्यमंत्री रहते मैंने 12000 लोगों के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी थीं। अलगाववादियों को बातचीत के लिए आमंत्रित करने को पत्र लिखा था।
क्या आप आज ऐसा कर सकते हैं? यदि आज मुख्यमंत्री के रूप में एक एफआईआर वापस नहीं ले सकते, तो ऐसे पद से कोई क्या करेगा। महबूबा मुफ्ती ने कहा, नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बने रहने तक चुनाव नहीं लड़ने की बात कही थी, लेकिन अब उनका मन बदल गया है। उमर ने खुद कहा था कि एक चपरासी के तबादले के लिए उन्हें उप राज्यपाल के दरवाजे पर जाना होगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के बीच गठबंधन पर पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि दोनों पार्टियां हमेशा सत्ता के लिए एक साथ आई हैं। जब हमने 2002 में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था, तो हमारा एक एजेंडा था। हमने सैयद अली गिलानी को जेल से रिहा किया।
जब 2014 में भाजपा के साथ गठबंधन किया था तो हमारे पास गठबंधन का एजेंडा था, जिसमें हमने लिखित में दिया था कि अनुच्छेद 370 को नहीं छुआ जाएगा। अफस्पा को रद्द कर दिया जाएगा, पाकिस्तान और हुर्रियत के साथ बातचीत, बिजली परियोजनाओं की वापसी आदि, एक एजेंडा था। लेकिन जब कांग्रेस-नेकां गठबंधन बनाते हैं, तो यह सत्ता के लिए होता है।