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अपने श्रद्धालुओं की विपदा को हरत हैं प्रभु : शास्त्री

Fri, 25 Apr 2025 02:56 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
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त्रिलोपुर में श्रीमद्भागवत कथा का सातवां दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। प्रभु अपने श्रद्धालुओं का पूरा ध्यान रखते हैं। जब भी उन पर कोई विपदा आती है तो वह उसका तारण करते हैं। यह ज्ञान कथा वाचक मृदुल मोहन शास्त्री ने त्रिलोकपुर गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा में दिया।
सातवें दिन उन्होंने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भीक्षा मांगकर परिवार का पालन पोषण करते। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते।
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पत्नी सुशीला सुदामा से बार-बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारिकाधीश हैं। उनसे जाकर मिलो तो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारिका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़ कर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं।
उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सुदामा को सिंहासन पर बिठाकर कृष्ण सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से वहां महल बना पाते हैं। लेकिन, सुदामा अपनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं।
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अगले प्रसंग में शुकदेव ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। शुक्रवार को हवन, कलश विसर्जन एवं भंडारे के साथ कथा सम्पन्न होगा।
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