घटना के दाैरान कुल्ले के नजदीक कर रही थी काम, खुद भी 80 फीसदी तक झुलसी
रोजी देवी
मिश्रीवाला। जब बात जिगर के टुकड़े की जान पर बन आए तो मां अपनी जान भी दांव पर लगा देती है। ललयाल कैंप में कुल्ले की आग में झुलसी चार माह की बच्ची को बचाने के लिए उसकी मां ने ऐसा ही किया। बच्ची को जलते हुए देख मां ने उसे सीने से चपकाया, दौड़ती चली गई। जहां उसे नहर दिखी, वहां छलांग लगा दी।
ललयाल के गुज्जरो के कुल्ले में ज़ब आग लगी तो नाजिया कुल्ले के बाहर कुछ काम कर रही थी। तभी उसने देखा कि कुल्ले में आग लग गई है और देखते ही देखते आग ने पूरे कुल्ले को अपनी चपेट में ले लिया। नाजिया ने कुल्ले से लपटें उठतीं देखीं और चीखती हुई उस ओर भागी। वह अपने बच्चों को लगातार आवाज लगा रही थी। आग की लपटें तेजी से फैल रही थीं और धुआं इतना घना था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
नाजिया की चार माह की बच्ची अंदर लेटी हुई थी। नाजिया ने बिना समय गंवाए ने बच्ची को उठाया और उसे अपनी छाती से लगाकर बाहर की ओर भागी। नाजिया बच्ची को लेकर कुल्ले लकड़ियों को पीछे करके ओर बच्ची को आके कि लपटों से बचाकर बाहर भागने की कोशिश करने लगी।
आग की लपटें उनके चारों ओर थीं और गर्मी असहनीय हो रही थी। नाजिया ने अपनी पूरी ताकत से लकड़ियों को धकेला और बाहर कूद गई ओर कुल्ले से थोड़ी दूर सड़क के दूसरी ओर बहते सुए जिसे छोटी नहर कहते हैं कि ओर भागी। भागती हुई नाजिया खुद आग की लपटों से लेकिन तब तक वह खुद पूरी तरह आग कि चपेट में आ चुकी थी ओर उसके कपड़ो में लगी आज के कारण उसकी छाती से लगी बच्ची भी काफ़ी हद तक जल गई थी।
कुछ ही देर में पड़ोसी और फायर ब्रिगेड की टीम वहां पहुंच गई और आग पर काबू पाया। पुलिस ने नाजिया ओर उसकी बेटी को तुरंत अस्पताल ले पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि नाजिया 100 फीसदी ओर उसकी बेटी 80 प्रतिशत झुलस गई है। संवाद