शांति दूत सम्मेलन में पहुंचे उपराज्यपाल ने बापू को किया नमन, सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया
देश की स्वतंत्रता के लिए खुद को समर्पित करने वाले नेताओं, सेनानियों और बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि
गांधी ग्लोबल फैमिली ने उपराज्यपाल को शांति दूत सम्मान से किया सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि वंचित वर्ग का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यह बातें उन्होंने वीरवार को गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से आयोजित शांति दूत सम्मेलन में कहीं। साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया।
कार्यक्रम में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों, नेताओं और बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने साथ ही सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया। गांधी ग्लोबल फैमिली की ओर से उपराज्यपाल को शांति दूत सम्मान से सम्मानित किया गया।
एलजी ने कहा कि गांधीजी हमेशा सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों व मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थे, जो समय व स्थान से परे हैं। वे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे। उन्होंने मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान और प्रत्येक भारतीय की भलाई के लिए हमारा मार्गदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि समाज विघटन के दौर में बापू के आदर्श ही सही रास्ता दिखाएंगे। उपराज्यपाल ने समाज के हर वर्ग से महात्मा गांधी के आदर्शों और मूल्यों के प्रति खुद को फिर से समर्पित करने का आह्वान किया। साथ ही गरीबों, युवाओं, महिलाओं और किसानों के सशक्तिकरण के लिए एक साथ आने व विकसित भारत के सपने को साकार करने में बहुमूल्य योगदान देने पर जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्य सचिव अटल डुल्लू, एडीजीपी जम्मू आनंद जैन, संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार समेत बड़ी संख्या में नागरिक प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों के सेवानिवृत्त और सेवारत अधिकारी व गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
एक माह तक मनाते रहेंगे गांधी जयंती समारोह
गांधी ग्लोबल फैमिली जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. एसपी वर्मा की मांग पर उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में एक माह तक गांधी जयंती समारोह जारी रहेगा। पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं डॉ. एसपी वर्मा, प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, डॉ. जितेंद्र उधमपुरी और रोमालो राम सहित मेधावी छात्रों व युवाओं को उपराज्यपाल ने गांधी दूत सम्मान से सम्मानित किया।
मौन रखकर लिया संकल्प
राष्ट्रपिता और भारत की आजादी के संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बलिदानियों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। गांधी जी के दृष्टिकोण, आदर्शों और दर्शन को बनाए रखने और बढ़ावा देने की शपथ भी दिलाई गई।