बाल्मीकि समाज ने कहा कि बेरोजगार युवा अभी भी नौकरी की तलाश में, भूमिहीन को नहीं मिली भूमि। पदोन्नति का रास्ता भी नहीं हुआ साफ, अलग कॉलोनियां पर भी नहीं बनी बात।
बाल्मीकि समाज पर अब बाहरी का ठप्पा तो जरूर नहीं रहा, लेकिन दो सालों में उन्हें कोई लाभ नहीं मिला। दो साल में लोगों के कामकाज निपटाने के लिए सिर्फ डोमिसाइल प्रमाण पत्र ही जारी हुए। विभागों में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को अब तक पदोन्नति भी नहीं मिल पाई। यूटी बनने से पहले भी हालात ऐसे ही थे। अनुच्छेद 370 हटने और यूटी बनने के बाद बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिलने का रास्ता साफ हुआ, लेकिन डोमिसाइल बनने के बाद भी युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाई।
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इसी तरह भूमिहीन लोगों को भूमि उनके नाम पर होनी थी। इस पर कई बार मांग भी की गई, मगर भूमि नाम करने की कवायद सिरे नहीं चढ़ पाई। बाल्मीकि समाज और सफाई से जुड़े लोग कई बार मांग कर चुके हैं। सिविक सफाई कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष रिंकू गिल ने कहा कि यूटी बनने से पहले जो हालात थे। आज भी सफाई कर्मचारी वैसे ही हैं। बस नाम यूटी हुआ है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति के नाम पर कुछ नहीं हुआ। अभी तक विभागों में दो साल में लोगों को पदोन्नति नहीं दी गई है।
बाल्मीकि समुदाय से भरत हंस ने कहा कि बेरोजगारी खत्म होने और जमीन मिलने के नाम पर कुछ नहीं हुआ। लोग आज भी क्वार्टरों पर रहने को मजबूर हैं। सुरेश कुमार और संत राम ने कहा कि यूटी बनने के बाद उम्मीद थी कि कुछ नया होगा। मगर, डोमिसाइल की शर्त और अब तक न तो नौकरी और न ही पदोन्नति मिली। यह बाल्मीकि समुदाय के साथ अन्याय है। यूटी बनने के बाद तमाम लाभ लोगों को मिलने चाहिए।