दो दिन बाद ईद-उल-अजहा का त्योहार है, लेकिन कश्मीर के बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही है। कोरोना की पाबंदियों के चलते सही से बाजार खुल नहीं रहे हैं और साथ ही महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि आम आदमी खरीदारी नहीं कर पा रहा। वहीं सरकार द्वारा तय किए गए दामों से कही ज्यादा दामों पर कुर्बानी के जानवर बेचे जा रहे हैं। इस बीच प्रशासन ने लोगों से ईद के मौके पर सामूहिक नमाज से परहेज करने की अपील भी की है।
कश्मीर में ईद 21 जुलाई को मनाई जा रही है, लेकिन ईद से पहले बाजार में ईद की खरीदारी के रंग फीके दिख रहे हैं। वीकेंड लॉकडाउन के चलते बाजार शनिवार को बंद रहे, हालांकि ट्रेडर्स यूनियन की ओर से प्रशासन से बाजारों को खुले रखने की अपील भी की थी। ईद के मौके पर अकसर दुकानें सजती थीं और पटरियों पर भी बाजार लगते थे, लेकिन लगातार दूसरे साल कोरोना के चलते वो रौनक देखने को नहीं मिली।
स्थानीय गुलजार अहमद ने बताया कि कुर्बानी के जानवर भी महंगे बिक रहे हैं। ईदगाह में भेड़ खरीदने पहुंचे मेहराज अहमद ने बताया कि सरकारी रेट से कई ज्यादा रेट पर जानवर बेचे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 330 से 370 रुपये प्रति किलो भेड़ बेची जा रही है जबकि सरकारी रेट 285 है।
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खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के निदेशक डॉ. अब्दुल सलाम मीर ने बताया कि हाल ही में एक आदेश जारी किया गया है जिसमें यह साफ तौर से कहा गया है कि दिल्ली वाले और मेरिनो क्रॉस किस्मों की भेड़ की कीमत 285 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है, जबकि बकरवाल और कश्मीरी किस्मों के लिए 270 रुपये प्रति किलो। उन्होंने बताया कि बकरी के लिए 260 रुपये प्रति किलो रेट तय किए गए हैं। ज्यादा वसूली पर कार्रवाई की जाएगी।