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जम्मू-कश्मीर : जिहाद के नाम पर घाटी में घोला जा रहा है जहर, ये भी है आशंका

Sat, 09 Oct 2021 04:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

कश्मीर में अल्पसंख्यकों को नहीं बसने देने की पाकिस्तानी साजिश। हिंदुओं के साथ अब दूसरे समुदाय के लोगों को भी बना रहे निशाना। टीआरएफ घाटी में स्थानीय युवाओं से करवा रहा है टारगेट किलिंग। अलगाववादी ताकतों के फिर सिर उठाने की आशंका, स्थानीय युवाओं को फंडिंग का भी शक। 
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demo pic... - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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कश्मीर में जिहाद के नाम पर स्थानीय युवकों को बरगलाकर कश्मीरियत की संस्कृति में जहर घोला जा रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले दो साल से कश्मीर में शांति तथा विकास की बयार से बौखलाए पाकिस्तान ने अब हिंदुओं के साथ ही अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को भी निशाना बनाने की साजिश रची है। इसके लिए वो टीआरएफ से टारगेट किलिंग करवा रहा है।

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नब्बे के दशक के हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है ताकि हिंदुओं समेत अन्य समुदायों के लोग घाटी का रुख न कर सकें। हिंदू-मुस्लिमों के बीच बढ़ रहे आपसी सौहार्द को भी बिगाड़ने की साजिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें अलगाववादी ताकतों के फिर से सिर उठाने की आशंका है। अलगाववादी मानसिकता के कुछ ब्यूरोक्रेट्स भी इस साजिश में शामिल हो सकते हैं। 

विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद घाटी में जिहादी मानसिकता बढ़ी है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा के जरिये ऐसे स्थानीय युवाओं को बहकाया जा रहा है जो नशे के आदी हों। ऐसे युवाओं को सॉफ्ट टारगेट की रेकी का जिम्मा सौंपा जाता है। रेकी के बाद उन्हें हथियार थमाकर हत्या की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। आशंका जताई जा रही है कि इन सब घटनाओं के पीछे अलगाववादी ताकतों से जुड़े कैडर का भी इस्तेमाल किया जा रहा हो। सूत्रों के अनुसार घाटी में माहौल बिगाड़ने के लिए सीमापार से फिर फंडिंग शुरू कर दी गई है। युवाओं को टारगेट किलिंग के लिए पैसे दिए जा रहे हैं। पहले पत्थरबाजी के लिए पैसे दिए जाते थे। 
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अलगाववादी खेमा परदे के पीछे: ले. जनरल राकेश शर्मा
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राकेश शर्मा का कहना है कि दोबारा 90 जैसे हालात पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे दो कारण हो सकते हैं। पहला कश्मीर में आधार खोता देख अलगाववादी, हुर्रियत व जमात की ओर से पर्दे के पीछे से इस प्रकार की वारदातों को अंजाम देने के लिए फंडिंग की जा रही हो।

इसमें कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की भी शह हो सकती है। दूसरा तालिबान राज के बाद पाकिस्तान का हौसला बढ़ा है जिससे वो इस तरह की घटनाएं करवा रहा है। यह सब कुछ भय का वातावरण पैदा करने की साजिश है ताकि हिंदू समाज के लोग यहां से भागें और कोई यहां आने की न सोचे। सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ऐसे तत्वों को प्रश्रय देने वालों को भी न बख्शा जाए। नौकरशाहों को भी चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। खुफिया सूचना आधारित ऑपरेशन स्लीपर सेल व ओजीडब्ल्यू के खिलाफ करनी चाहिए। 

आईएसआई ने बदली रणनीति, स्थानीय युवाओं को बनाया हथियार
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के रक्षा अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. जे जगन्नाथ का कहना है कि पाकिस्तान के आईएसआई प्रमुख बदलने के बाद से रणनीति में बदलाव आया है। आतंकियों की बजाय अब नशे में फंसे स्थानीय युवाओं को टारगेट किलिंग के लिए हथियार बनाया जा रहा है। ऐसे युवाओं का सोशल मीडिया के जरिये ब्रेन वॉश कर उनमें कट्टरता का बीज बोया जा रहा है।

हथियारों की सप्लाई का सिस्टम बंद हो गया है। एलओसी ट्रेड बंद होने तथा आईबी व एलओसी पर सख्ती से बड़े हथियार नहीं आ पा रहे हैं। इस वजह से ड्रोन से पिस्टल गिराई जा रही हैं, ताकि टारगेट किलिंग में इसका इस्तेमाल किया जा सके। हालात यह है कि पिछले दो साल से शांति का जीवन जी रहा आम कश्मीरी भी इस वक्त दहशत में है। उसे दोबारा से पुराने हालात का सामना करने का खतरा सता रहा है। ऐसे में कश्मीरी अवाम तथा सिविल सोसाइटी के लोगों को आगे आकर लोगों खासकर युवाओं को समझाना होगा कि यह रास्ता ठीक नहीं है। 

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