किसानों की छह महीने की मेहनत पर एक बार फिर कुदरत की मार पड़ी है। हाल में हुई बारिश और ओलावृष्टि ने धान समेत आधा दर्जन फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। कृषि विभाग ने राजस्व विभाग और बीमा कंपनियों से मिलकर नुकसान का आकलन कर लिया है। इसमें फसलों का 100 फीसदी आर्थिक नुकसान रिकॉर्ड किया गया है। इस रिपोर्ट को सरकार के पास भेज दिया गया है, ताकि किसानों को मुआवजा मिल सके।
जानकारी के अनुसार 23 अक्तूबर को 24 घंटे में ही 80 से 100 एमएम बारिश हुई। चार से पांच चरणों में ओले भी गिरे। इससे धान की खड़ी और काटी हुई फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। सबसे ज्यादा जम्मू जिला प्रभावित हुआ है। यहां 100 फीसदी फसलें नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा सांबा के रामगढ़ और विजयपुर में भी 100 फीसदी फसल नष्ट हो गई। कठुआ के पहाड़ी इलाकों और अन्य जिलों में भी बड़े स्तर पर नुकसान हुआ है।
कितनी और कौन सी फसल नुकसान
धान एक लाख हेक्टेयर 100 फीसदी
सब्जियां 5 हजार हेक्टेयर 100 फीसदी
तिलहन 2 हजार हेक्टेयर 100 फीसदी
आलू एक हजार हेक्टेयर 100 फीसदी
चारा एक हजार हेक्टेयर 100 फीसदी
सौ से ज्यादा बीज फार्म प्रभावित, अगले सीजन में होगा संकट
कुदरत की मार से सिर्फ किसानों की फसलें ही नहीं, बल्कि कृषि विभाग और कृषि विश्वविद्यालय के बीज गुणन फार्म भी नहीं बच पाए। विभाग के 100 से ज्यादा फार्म 100 फीसदी नष्ट हो गए हैं। धान, तिलहन, आलू और दलहन के सभी बीज गुणन फार्म की फसलें नष्ट हो गई हैं। इससे अगले सीजन के लिए बीज का जबरदस्त संकट होगा।
20 फीसदी फसल का ही बीमा
जानकारी के अनुसार एक लाख हेक्टेयर फसल धान की, 5 हजार सब्जियां, 2 हजार तिलहन, एक हजार आलू और एक हजार हेक्टेयर चारा नष्ट हुआ है। लेकिन फसल बीमा योजना में महज 19529 हेक्टेयर फसल ही कवर है, जिसमें 43220 किसान पंजीकृत हैं। ऐसे में सिर्फ 20 फीसदी फसल उगाने वाले किसान ही बीमा योजना के तहत कवर हैं। कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनियों ने मिलकर फसलों का आकलन किया है। इसमें फसलों को 100 फीसदी नुकसान बताया गया है। इन पंजीकृत किसानों को बीमा के तहत बीमा राशि मिलेगी। लेकिन बाकी के किसानों को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के नियमों के तहत ही मुआवजा मिलेगा।
सरकार को दे दी गई है रिपोर्ट
फसलों को 100 फीसदी नुकसान पहुंचा है। बारिश के साथ पांच बार ओले गिरे हैं। इसकी वजह से खड़ी और कटी दोनों ही फसलें नष्ट हो गईं। आकलन करके रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। नियमों के तहत किसानों को मुआवजा मिलेगा।
- केके शर्मा, निदेशक, कृषि विभाग, जम्मू
प्रति कनाल 10 हजार मिले मुआवजा
विभिन्न किसान संगठनों का कहना है कि किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। लिहाजा एक विशेष पैकेज जारी कर किसानों को प्रति कनाल 10 हजार रुपये तक का मुआवजा दिया जाए। जम्मू-कश्मीर किसान काउंसिल के प्रधान तेजिंदर सिंह वजीर का कहना है कि प्रति कनाल धान के लिए किसानों को 10 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। लिहाजा इसके लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा मिले। साथ ही 5 हजार रुपये उसकी छह महीने की मेहनत के दिए जाएं। क्योंकि 10 हजार खर्चा तो धान की फसल पर ही हो जाता है। किसान नेता राजेश शर्मा का कहना है कि गेहूं की फसल भी खराब हो गई थी। अब धान भी चौपट हो गया। नुकसान पर समय से और पूरा मुआवजा नहीं मिलता। किसानों को समय से पूरा मुआवजा दिया जाए, ताकि वह अगले सीजन की तैयारी कर सकें।
अगली फसल के लिए सब्सिडी पर खाद और बीज
किसानों ने अपनी फसलों के नुकसान की जानकारी उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान को दी है। सलाहकार ने कहा है कि अगली फसल के लिए किसानों को सब्सिडी पर बीज और खाद देने पर काम चल रहा है। इसके अलावा बीमा कंपनियों और कृषि विभाग को संयुक्त रूप से सर्वे करके नुकसान का आकलन करने के लिए कहा गया है। किसानों को जायज मुआवजा दिया जाएगा। किसान बोर्ड के पूर्व चेयरमैन दलजीत सिंह ने फारूक खान के साथ मिलकर किसानों के हाल से अवगत भी कराया है।