जम्मू-कश्मीर, लद्दाख हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट और सहयोगी अदालतों में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय नीति लागू कर दी है। इसके तहत हर अधिकारी को निशुल्क आवास मिलेंगे। यह आवास तैनाती वाली जगह ही मिलेंगे। आवास आवंटन वरिष्ठता के आधार पर दिए जाएंगे।
आवास नीति के तहत किसी भी अफसर की पोस्टिंग के अलावा किसी दूसरे स्थान पर आवास लेने के लिए आवेदन मंजूर नहीं किया जाएगा। नई नीति के तहत यदि कोई अफसर रिटायर होने वाला है तो रिटायरमेंट के अधिक से अधिक चार हफ्तों तक वह आवास में रह सकता है। इसके बाद आवास छोड़ना होगा।
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हाईकोर्ट की अनुमति के बिना अफसर आवास में कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे, न ही सरकारी आवास के ढांचे में किसी तरह का परिवर्तन कर सकते हैं। स्थानांतरण होने पर अफसरों को दो हफ्तों के बाद ही आवास छोड़ना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने यह नीति न्यायिक अफसरों को बेहतर आवासीय सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई है।