हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस से प्रदेश में नशा तस्करी की मौजूदा स्थिति की बारे में जानकारी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्या पुलिस इस पर नियंत्रण पाने में सक्षम है या नहीं। एक हलफनामे में इसका जवाब देने के लिए कहा गया है।
इससे संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस रजनीश ओसवाल वाली खंडपीठ ने वीरवार को यह आदेश दिया। अथर्व महाजन ने कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि प्रदेश में युवा तेजी से नशे की चपेट में आ रहे हैं। जबकि नशा तस्करों पर कार्रवाई करने के बाद उनको सजा कम मिलती है।
कोर्ट ने एक महीने के भीतर हलफनामा पेश करने को कहा है। अथर्व ने अपनी याचिका में बताया था कि नशेड़ी वर्ग 14 से 30 वर्ष की आयु के भीतर है। लोगों को लगता है कि सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है, लेकिन सबसे बड़ा खतरा ड्रग्स का है, जो युवाओं के मस्तिष्क को प्रदूषित कर रहा है और उन्हें आतंकवाद के माध्यम से मारे जाने की तुलना में बहुत अधिक गति से चुपचाप मार रहा है। अथर्व ने कुछ मामलों की विशेष रूप से कोर्ट में जानकारी दी है, जिसमें युवाओं की मौत शामिल है।
जम्मू शहर में विशिष्ट क्षेत्र का भी उल्लेख किया है, जहां ड्रग्स की खुली बिक्री और खपत खुले तौर पर देखी जा सकती है। कोर्ट में यह भी कहा कि पुलिस ड्रग माफिया को नियंत्रित करने के लिए गंभीर नहीं दिखती है और इन ड्रग माफिया के साथ हाथ मिलाती है, क्योंकि हाल ही में ड्रग तस्करी के आरोप में राजौरी जिले में पुलिस कांस्टेबल को भी गिरफ्तार किया गया था।
ये भी पढ़ें- पीपीई किट पहन लूटी बैंक: पुलिस के हाथ लगी कार और राइफल, इस तरह अंजाम दी गई थी वारदात