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जम्मू-कश्मीर : आजादी से ठीक पहले आए थे गांधी जी, तनाव के बीच मिले थे महाराजा हरि सिंह से 

Sun, 30 Jan 2022 04:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

मुलाकात के साक्षी डॉ. कर्ण सिंह बोले-दोतरफा तनाव के माहौल में गांधी जी ने घंटे भर तक की थी बातचीत। गुलाब भवन में चिनार के पेड़ के नीचे हुई थी मुलाकात। जम्मू के अंबफला व कुद में भी लौटते समय रुके थे गांधी जी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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भारत-पाकिस्तान के बीच बंटवारे और महाराजा हरि सिंह व मोहम्मद शेख अब्दुल्ला के बीच तनाव के माहौल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अगस्त के पहले सप्ताह जम्मू-कश्मीर आए थे। उन्होंने तीन दिन कश्मीर और दो दिन जम्मू में बिताए। इस दौरान उन्होंने श्रीनगर में महाराजा हरि सिंह से मिलकर पूरे परिदृश्य पर चर्चा की। मोहम्मद शेख अब्दुल्ला की पत्नी बेगम अकबर जहां से मुलाकात की और प्रार्थना सभा को भी संबोधित किया। शेख अब्दुल्ला जेल में थे। उनकी यात्रा के बाद शेख अब्दुल्ला को जेल से रिहा किया गया।

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तत्कालीन राजकुमार डॉ. कर्ण सिंह जो उस समय 16 साल के थे, उनकी यात्रा के गवाह रहे। जम्मू के मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जमवाल को भी श्रीनगर में उन्हें सुनने का मौका मिला था। वह उस वक्त युवावस्था में थे, जो भर्ती के सिलसिले में वहां गए थे। हालांकि, उनकी मुलाकात गांधी जी से नहीं हुई थी। डॉ. कर्ण सिंह बताते हैं कि अगस्त के पहले सप्ताह में महाराजा हरि सिंह और महात्मा गांधी की मुलाकात हुई थी। इस दौरान महारानी तारा देवी भी थीं। चोट के कारण वे स्वयं व्हील चेयर पर रहते हुए भी इस बातचीत में शामिल हुए थे। 

उनके अनुसार गुलाब भवन के प्रांगण में चिनार के एक पेड़ के नीचे मुलाकात हुई थी। यह चिनार अब भी है। उनका कहना है कि पूरे महल को सादगी से सजाया गया था। महात्मा गांधी को लेने के लिए महाराजा हरि सिंह खुद पोर्च तक गए। महाराजा हरि सिंह के साथ करीब एक घंटे तक बैठक चली। विभाजन का दौर था। इसी पर बात हुई। मोहम्मद शेख अब्दुल्ला का विषय भी बातचीत में आया था। 
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बताते हैं कि महात्मा गांधी श्रीनगर में सेठ किशोरी लाल के मकान में रुके थे। यहां आयोजित प्रार्थना सभा में जेल में बंद मोहम्मद शेख अब्दुल्ला की पत्नी बेगम अकबर जहां और बेटी खालिदा शाह भी शामिल हुईं थीं। बाद में वे सौरा स्थित मकान पर जाकर भी इन दोनों से मिले थे। तनाव के बाद भी उन्होंने कश्मीर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपसी सद्भाव व भाईचारे को देखते हुए कहा था कि यदि कहीं शांति, सद्भाव व सौहार्द की किरण नजर आती है तो वह कश्मीर है। 

भीड़ बढ़ने पर झेलम से ले जाया गया
जानकारों का कहना है कि कश्मीर में महात्मा गांधी का भव्य स्वागत किया गया था। दूरदराज के गांवों से भी लोग उमड़ पड़े थे। सड़क पर भीड़ इतनी अधिक हो गई कि उन्हें झेलम नदी के जरिये नाव से श्रीनगर लाया गया। इसमें हिंदू-मुसलमान, कश्मीरी पंडित, सिख सभी लोग थे।  

जम्मू के अंबफला व कुद में भी किया था प्रवास
कश्मीर के बाद गांधी जी जम्मू भी आए। रास्ते में वे कुद में रेशम घर और जम्मू के अंबफला में जगन्नाथ शर्मा के मकान पर रुके। जगन्नाथ शर्मा रणबीर प्रिंटिंग प्रेस के महाप्रबंधक थे। अंबफला में अब भी यह मकान है, लेकिन इसमें अब कोआपरेटिव पब्लिक स्कूल चल रहा है। जगन्नाथ शर्मा के परिवार के सदस्य विकास शर्र्मा का कहना है कि मकान में अब तो कोई निशानी नहीं रह गई है। लेकिन गांधी जी ने यहां प्रवास किया था। इस दौरान उन्होंने प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया था। 

गांधी के पड़ाव स्थल बनाए जाएं हेरिटेज साइट
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जम्मू निवासी एसपी वर्मा कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में महात्मा गांधी की यात्रा ऐतिहासिक थी। उन दिनों जवाहर टनल नहीं होती थी। वह पहाड़ के ऊपर से होते हुए जम्मू पहुंचे थे। उनके यात्रा मार्ग पर पड़ाव स्थलों को हेरिटेज साइट के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही कुद में जहां वह ठहरे थे वहां महात्मा गांधी पीस एंड लर्निंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाए। यहां युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें मूल्यों का समावेश किया जाए। साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी यह सकारात्मक कदम हो सकता है। 

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