अपने समय में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सबसे मजबूत थी, वर्तमान में इसका स्वरूप शक्तिहीन सदन का है। मैं इसका सदस्य नहीं बनूंगा। मेरी मर्जी के खिलाफ मुझ पर चुनाव लड़ने के लिए कोई दबाव नहीं डाल सकता। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला का।
वह जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने तक विधानसभा चुनाव न लड़ने के अपने एलान के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके उमर अब्दुल्ला ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस और जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने एक एजेंसी के साथ बातचीत में सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का मैं नेता रहा हूं। अपने समय में यह सबसे मजबूत विधानसभा थी। उन्होंने कहा, चुनान न लड़ने की घोषणा कोई धमकी या ब्लैकमेल नहीं है, यह निराशा का इजहार नहीं है।
यह एक सामान्य स्वीकारोक्ति है कि मैं इस तरह की कमजोर विधानसभा (केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा) का नेतृत्व करने के लिए चुनाव नहीं लड़ूंगा। संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किए जाने के मुखर आलोचक उमर ने कहा कि विशेष दर्जा खत्म करने के लिए कई कारण गिनाए गए और दावा किया कि उनमें से किसी भी तर्क की कोई जांच नहीं की गई।