दक्षिण कश्मीर के शोरपियां जिले के मोलू चित्रगाम इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया। मारे गए आतंकी की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। इलाके में और आतंकियों के छिपे होने की आशंका के चलते अभियान अभी जारी है।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार को सुरक्षा बलों को सूचना मिली कि चित्रगाम इलाके में कुछ आतंकी छिपे हुए हैं। सूचना के बाद पुलिस, 44 राष्ट्रीय राइफल्स और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने इलाके को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।
दिन के उजाले में चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान एक संदिग्ध स्थान पर छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलाबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालने के साथ ही जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एक आतंकी मारा गया।
इसके बाद थोड़ी देर के लिए फायरिंग रुक गई। थोड़ी देर बाद फिर गोलियां चलने की कुछ आवाजें सुनाई दीं। सुरक्षाबलों ने घेरे को और सख्त करते हुए घर-घर की तलाशी शुरू कर दी है। आशंका है कि इलाके में कुछ और आतंकी छिपे हो सकते हैं। मारे गए आतंकी के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
लोगों को घरों में ही रहने के निर्देश
सुरक्षाबलों ने आम लोगों से अपील की है कि ऑपरेशन पूरा होने तक अपने घरों में ही रहें। आम जनता की जान की हिफाजत के लिए यह आवश्यक है।
अब तक 300 से ज्यादा आतंकी मारे गए
सुरक्षा बलों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से अगस्त माह तक 300 से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं। दो दिन पहले उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में लश्कर के ऑपरेशनल कमांडर हैदर समेत तीन आतंकी सुरक्षा बलों ने मार गिराए थे। इनमें एक पाकिस्तानी उस्मान भी था।
शोपियां से आतंकियों के 4 मददगार गिरफ्तार
दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने बुधवार को आतंकियों के चार मददगारों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चार हथगोले और एके 47 के 100 कारतूस बरामद किए हैं। इनकी शिनाख्त इम्तियाज अहमद डार (रत्नीपोरा), परवेज अहमद कुमार (पिंजोरा), सज्जाद अहमद धोबी (पिंजोरा) और हिलो इमाम साहिब निवासी शाहिद मंजूर के रूप में हुई है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सूचना मिली थी कि कुछ स्थानीय लोग आतंकियों की मदद कर रहे हैं। इसके बाद 44 राष्ट्रीय राइफल्स ने अभियान चलाकर इन सभी को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार पकड़े गए सभी आतंकी मददगार दहशतगर्दों की रहने, छिपने, खाने और परिवहन के साथ जरूरत के अनुसार हथियारों की भी सुविधा मुहैया कराते थे। पुलिस अब इन मददगारों का पिछला रिकार्ड और नेटवर्क को तलाशने में जुटी है।