जम्मू-कश्मीर में इलेक्ट्रिक वाहनों पर पंजीकरण शुल्क नहीं लगाने के बावजूद लोगों का इन्हें खरीदने में कोई रुझान नहीं है। आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों के लिए अभी भी पेट्रोल और डीजल के वाहनों की खरीद को महत्व दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (जेकेआरटीसी) के बेड़े में 40 इलेक्ट्रिक बसों के अलावा कोई सार्वजनिक वाहन परिवहन विभाग के पास पंजीकृत नहीं है।
प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पंजीकरण शुल्क नहीं लगने का फैसला लिया था। इसके चार महीने बाद भी इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण नहीं हो रहा है। जम्मू जिले में अभी तक सिर्फ 10 दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए है। 50 सीसी से कम के इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण आरटीओ और एआरटीओ में नहीं होता है। प्रदेश में प्रति वर्ष औसतन 50 से 70 हजार वाहन पंजीकृत होते हैं।
इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या एक फीसदी भी नहीं है। परिवहन निगम भी मानता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का कम रुझान सुविधाओं का अभाव है। लोग गाड़ियां तो खरीदना चाहते हैं, लेकिन मेंटेनेंस और चार्जिंग की सुविधा नहीं होने से वाहनों की खरीद से बचते है। 50 सीसी के कम के इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद जरूर होती है, लेकिन कार या अन्य सार्वजनिक वाहनों की खरीद नहीं बढ़ रही।
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इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ अभी उतना रुझान नहीं बढ़ा पाया है। आरटीओ में दस के करीब ही दोपहिया वाहन पंजीकृत हुए हैं। कोविड के कारण लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है, जो कम रुझान होने का भी बड़ा कारण है। साथ ही बुनियादी ढांचे का अभाव भी है।
- प्रदीप कुमार, परिवहन आयुक्त