श्रीनगर के कई इलाकों में रविवार को अलगावादियों के बंद के चलते कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिये निषेधाज्ञा लागू की गई है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर के पांच थाना क्षेत्रों में धारा 144 लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पाबंदियां लगाई गई हैं उनमें नौहट्टा, खनयार, रैनावाड़ी, एम आर गंज और सफाकदल शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि बंद के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बरकरार करने के लिये ऐहतियाती तौर पर यह कदम उठाया गया है।
ज्वाइंट रेजिस्टेंट लीडरशिप (जेआरएल) के आह्वान पर अलगाववादियों ने रविवार को बंद बुलाया था। शनिवार को इसकी घोषणा की थी। बंद का कश्मीर घाटी में आम जीवन पर असर पड़ा है।
14 साल बाद बीएसएफ की तैनाती
श्रीनगर में 14 साल बाद बीएसएफ को तैनात किया जाएगा। आतंकवाद के दौर में बीएसएफ कानून व्यवस्था की स्थिति संभाल रही थी। बाद के दिनों में वर्ष 2004-05 में केंद्र ने सीआरपीएफ को लगा दिया। 2016 की हिंसा के बाद भी बीएसएफ को अस्थायी तौर पर लगाया गया था, लेकिन तुरंत ही इसे हटा लिया गया।
सीआरपीएफ से अधिक सख्त फोर्स है बीएसएफ
बीएसएफ को अधिक सख्त फोर्स माना जाता है। सीआरपीएफ की तुलना में यह माना जाता है कि बीएसएफ अधिक प्रशिक्षित फोर्स है। साथ ही उसे हर स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग हैं।
कश्मीर घाटी में अलगाववादियों व पत्थरबाजों पर शिकंजा
वहीं इससे पहले, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने शुक्रवार रात छापेमारी कर 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया। इनमें ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हैं। जमात के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज को भी हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को भी गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35-ए पर सोमवार से शुरू हो रही सुनवाई से पहले घाटी में तनाव के मद्देनजर यह धरपकड़ की गई है। हालांकि, पुलिस ने इसे नियमित प्रक्रिया बताते हुए कहा कि कुछ नेताओं और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया गया है।
दूसरी ओर, जमात ने दावा किया कि यह क्षेत्र में और अनिश्चितता की राह प्रशस्त करने के लिए साजिश का हिस्सा है। जमात पर यह पहली बड़ी कार्रवाई है। यह संगठन पूर्व में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था। हालांकि, उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया।