जमात पर पहली बार बड़ी कार्रवाई
बताते हैं कि जमात-ए-इस्लामी पर यह पहली बड़ी कार्रवाई है। संगठन पूर्व में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था। हालांकि, उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया।
व्यक्ति को हिरासत में रख सकते हैं विचारों को नहीं: महबूबा
श्रीनगर। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जमात-ए-इस्लामी के नेताओं पर छापेमारी की वैधता पर सवाल उठाया है। कहा कि मनमाने कदम से राज्य में मामला जटिल ही होगा। आप एक व्यक्ति को हिरासत में रख सकते हैं लेकिन उनके विचारों को नहीं। वे शुक्रवार रात में अलगाववादियों और जमात-ए-इस्लामी पर हुई सरकारी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रही थी।
महबूबा ने ट्वीट किया कि पिछले 24 घंटों में हुर्रियत नेताओं और जमात संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। इस तरह की मनमानी कार्रवाई को समझ नहीं पा रही हैं। इससे जम्मू कश्मीर में केवल हालात जटिल ही होंगे। उन्होंने कहा कि किसी कानूनी आधार पर उनकी गिरफ्तारी न्यायोचित ठहराई जा सकती है। केंद्र ने अर्द्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को बिना कोई कारण बताए कश्मीर रवाना किया है।
बल प्रयोग और डराने से स्थिति और खराब ही होगी: मीरवाइज
श्रीनगर। हुर्रियत (एम) प्रमुख मीरवाइज उमर फ ारूक ने जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को हिरासत में लेने और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं पर छापेमारी और गिरफ्तारी की निंदा की। कहा कि बल प्रयोग और डराने से स्थिति केवल खराब ही होगी। ट्वीट किया कि जमात-ए-इस्लामी नेतृत्व और इसके कार्यकर्ताओं पर रात में हुई कार्रवाई और यासीन मलिक की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं। कश्मीरियों के खिलाफ इस तरह के गैरकानूनी और कठोर उपाय निरर्थक हैं। इससे जमीन पर वास्तविकताएं नहीं बदलेंगी।
हालात और बिगड़ेंगे : सज्जाद
पीपुल्स कांफ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने भी इस पर सवाल उठाते हुए ट्वीट में लिखा कि सरकार गिरफ्तारी पर लगी हुई है। यह सिर्फ चेतावनी का एक संकेत है। 1990 में भी बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं। नेताओं को जोधपुर और देश की कई जेलों में भेज दिया गया था। हालात बिगड़ गए। यह एक आजमाया हुआ और विफ ल मॉडल है। कृपया इससे दूर रहें। यह काम नहीं करेगा। हालात बिगड़ेंगे।