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Jammu Election: नानक नगर में सरदार ही असरदार... मगर सुध नहीं लेती कोई भी सरकार; सिख समुदाय का दर्द

Mon, 23 Sep 2024 02:25 PM IST
शाहरुख खान राहुल दुबे, अमर उजाला, जम्मू

सार

जम्मू के नानक नगर लोग निराशा की डगर पर हैं। यहां लोग कहते हैं कि हम सिर्फ वोटर हैं, हमारा कोई सपोर्टर नहीं है। उनकी पंजाबी भाषा पर भी काम नहीं हो रहा है। ज्ञानी कोर्स तो बंद हो ही चुका है।
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jammu election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुबह 11 बजे का समय है। बाजार में दुकानें खुल गई हैं। लोग नौकरी-काम पर निकल रहे हैं। बड़े गुरुद्वारा पर लोग माथा टेकने आ रहे हैं। गुरुद्वारा के अंदर असीम शांति है। चुनावी माहौल है तो बाहर सड़कों पर प्रत्याशियों के बैनर होर्डिंग भी टंगे हैं। 
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दुकानों में बैठे लोगों से जिक्र करो तो सिख समुदाय के मुद्दे भी उभरकर आते हैं। दर्द यह भी है कि सिख समुदाय के लोगों की संख्या अन्य समाज की अपेक्षा कम हैं, लेकिन अल्पसंख्यक का दर्जा, उससे जुड़ी कोई सुविधा उन्हें आजतक नहीं मिली।

गुरुद्वारे के बाहर बेंच पर बैठे बलविंदर कहते हैं कि चुनाव के बारे में कुछ पता नहीं है, इस पर क्या बात करें। कुछ मांगे हैं जो शुरू से चली आ रही हैं। पूरी तो होती नहीं है, तो अब मांग नहीं करते हैं। गुरुद्वारे के पास में ही एक दुकान पर बैठे नवजीत सिंह खालसा कहते हैं कि स्पेशल स्टेटस का दर्जा हमारे समाज को मिलना चाहिए। 
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पंजाबी भाषा ही खत्म कर दी। हिंदी, संस्कृत, उर्दू पढ़ाई जा रही है, उसी तरह पंजाबी भी पढ़ाई जानी चाहिए। सरदार जितेंद्र सिंह कहते हैं कि पहले यहां ज्ञानी कोर्स होता था। उसी में बच्चे स्नातक करके नौकरी पा जाते थे। उसे करीब 35-40 साल पहले खत्म कर दिया। 

पाकिस्तान से आए तो सबकुछ वहीं छूट गया। कपड़ा व्यापारी सुखबीर कहते हैं कि सरकारें आती-जाती हैं। हमसे वादे भी खूब होते हैं, लेकिन, पूरे नहीं होते हैं। इसलिए अब वादों पर एतबार नहीं रहा है। कारण, हम पार्टियों की नजर में सिर्फ वोटर बनकर रह गए हैं, हमारा सपोर्टर कोई नहीं है।

हम भी कश्मीरी पंडितों की तरह रिफ्यूजी
नवजीत सिंह कहते हैं कि कश्मीरी पंडितों के साथ गलत हुआ। उन्हें अपना घर, जमीन सब छोड़ना पड़ा। इसी तरह हमारे समुदाय को भी विभाजन के समय पाकिस्तान छोड़ना पड़ा। यहां आए तो शुरूआत में सरकार की ओर से जमीन तो मिल गई, लेकिन फिर कोई मदद नहीं मिली।
 
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शुरूआत में मजदूरी कर, व्यापार करके हमने खुद को यहां स्थापित किया। अब हम ये नहीं कह रहे कि हमें पैसों की मदद दो। लेकिन, स्पेशल स्टेटस देकर नौकरी, पढ़ाई में छूट के हकदार तो हम भी हैं।

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