पाकिस्तान से आए तो सबकुछ वहीं छूट गया। कपड़ा व्यापारी सुखबीर कहते हैं कि सरकारें आती-जाती हैं। हमसे वादे भी खूब होते हैं, लेकिन, पूरे नहीं होते हैं। इसलिए अब वादों पर एतबार नहीं रहा है। कारण, हम पार्टियों की नजर में सिर्फ वोटर बनकर रह गए हैं, हमारा सपोर्टर कोई नहीं है।
शुरूआत में मजदूरी कर, व्यापार करके हमने खुद को यहां स्थापित किया। अब हम ये नहीं कह रहे कि हमें पैसों की मदद दो। लेकिन, स्पेशल स्टेटस देकर नौकरी, पढ़ाई में छूट के हकदार तो हम भी हैं।