बहुचर्चित रोशनी घोटाला और फर्जी गन लाइसेंस रैकेट में आईएएस, केएएस कैडर के करीब 40 अफसर सीबीआई के रडार पर हैं। इन पर सीबीआई कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। केंद्रीय गृह विभाग की ओर से सीबीआई को छूट मिलने के बाद जांच में तेजी लाई गई है।
पूर्व में जम्मू-कश्मीर के कई आईएएस, आईपीएस, केएएस अफसर अलग-अलग मामलों में फंस चुके हैं, लेकिन पूर्व सरकारों के प्रभाव से यह बच जाते थे। लेकिन हाल ही में सीबीआई ने गन लाइसेंस मामले में दो आईएएस अफसरों के आवास पर छापा मारकर साफ कर दिया है कि सरकार आईएएस क्लब को भी बख्शेगी नहीं। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि इन दोनों स्कैम में 40 से ज्यादा आईएएस, केएएस अफसर सीबीआई के रडार पर हैं।
जल्द ही सीबीआई इन पर कार्रवाई कर सकती है। इनमें से विभिन्न जिलों के उपायुक्त थे, जो इस समय या तो प्रदेश या फिर केंद्र में अलग-अलग विभागों के सचिव हैं। सीबीआई इन सभी अधिकारियों से पूछताछ करेगी। इनके आवास और कार्यालय भी खंगाले जा सकते हैं।
किसी अफसर को नहीं मिल पाई सूचना
25 जुलाई को जब सीबीआई ने एक साथ 40 जगहों पर छापा मारा तो किसी अफसर या गन डीलर को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां तक कि सीबीआई ने पुलिस और सीआरपीएफ के साथ मिलकर छापा मारा और सारे दस्तावेज जांचे गए। सीबीआई ने जांच प्रक्रिया को गोपनीय ढंग से अंजाम दिया।
खांडे और अजीत के अलावा किसी पर हाथ नहीं डाला
जम्मू-कश्मीर में आईएएस, आईपीएस, जेकेएएस अफसरों को गिरफ्तार करने या कार्रवाई करने की कोई खास परपंरा नहीं रही है। पूर्व मुख्य सचिव अजीत कुमार और इकबाल खांडे को छोड़ दिया जाए तो किसी मामले को लेकर कार्रवाई नहीं हुई। 1970 बैच के आईएएस अधिकारी अजीत कुमार पर 2004 में स्कूलों में दिए जाने वाली जूट चटाई घोटाले का एंटी करप्शन ब्यूरो ने केस दर्ज किया था। इसके बाद वह गिरफ्तार किए गए।
चार्जशीट पेश हुई, लेकिन कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह से आईएएस अधिकारी इकबाल खांडे 2006 में सैक्स स्कैंडल में पकड़े गए। बाद में छूट गए और मुख्य सचिव भी बने। हालांकि, बाद में उनका निधन हो गया।