सात दिन बाद भी फसल बेचने केंद्रों में नहीं पहुंचे 27 से शुरू हुई है मंडियां, 30 मई तक फसल बेचने की सरकार ने दी है सुविधा
सरकार के प्रति क्विंटल 2450 रुपये की जगह ठेकेदार दे रहे किसानों को 2600 रुपये
सतीश वालिया
जम्मू। किसान गेहूं की फसल को सरकारी खरीद केंद्रों (मंडियों) पर बेचने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। सात दिन बाद भी केंद्रों में किसान फसल बेचने नहीं पहुंचे। इसका कारण गेहूं का कम समर्थन मूल्य है। सरकार की ओर से गेहूं की फसल के प्रति क्विंटल 2450 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि ठेकेदार 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से फसल खरीद रहे हैं।
इस बार कृषि विभाग ने 27 अप्रैल से मंडियों का शुभारंभ किया था। यहां पर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से गेहूं की खरीद होनी है। मंडियों में किसान 31 मई तक गेहूं को बेच सकते हैं। इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य कृषि विभाग ने 25 हजार मीट्रिक टन निर्धारित किया है, जबकि 2024 में 20 हजार मीट्रिक टन था।
कृषि विभाग के अनुसार ठेकेदार सरकारी निर्धारित मूल्य से ज्यादा पैसे किसानों को दे रहे हैं। घरद्वार पर सुविधा मिलने से किसान मंडियों से किनारा कर रहे हैं। मंडियों में फसल खरीद और रखने के लिए व्यवस्था की गई है। हालांकि, बीते साल ज्यादा संख्या में किसानों ने फसल बेची थी।
अभी तक 21 गेहूं खरीद केंद्रों से हर रोज रिपोर्ट शून्य आ रही है। केंद्रों में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और कृषि विभाग के कर्मचारी तैनात हैं।
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इस कारण नहीं आ रहे किसान मंडियों में
-मंडियों में गेहूं सफाई शुल्क 50 रुपये लिया जाता है
-बार-बारी से गेहूं बेचने का इंतजार करना पड़ता है
-मंडियों तक गेहूं को पहुंचाने के लिए किराया अदा करना पड़ता है
-कई बार दो-दो दिन बाद बारी आती है
-मौसम खराब होने पर फसल भीगने का डर
संभाग में इतने हैं गेेहूं खरीद केंद्र
जिला केंद्र
कठुआ 10
जम्मू 11
सांबा 01
सरकार किसानों को नहीं दे रही प्रोत्साहन : किसान (फोटो सहित)
किसान एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य कुलभूषण खजूरिया ने कहा कि फसल के दाम निर्धारित से ज्यादा मिल रहे हैं। राजस्थान सरकार एक तरफ किसानों को डेढ़ सौ रुपये बोनस दे रही है, जबकि प्रदेश में ऐसी व्यवस्था नहीं है। प्रदेश में गेहूं कम होती है। प्रोत्साहन मिलना चाहिए। किसान विजय चौधरी निवासी रामगढ़ ने कहा कि ठेकेदार खेतों से फसल उठा रहे हैं। साथ ही मौके पर पैसा मिल रहा है। फसल को मंडियों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त खर्चा नहीं करना पड़ रहा है। किसान प्रकाश चौधरी निवासी सांबा ने कहा कि सांबा में एक ही मंडी है। ऐसे में किसानों को फसल बेचने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इस कारण भी किसान खेतों से ही फसल बेच रहे हैं।
कोट
मंडियों में अभी तक गेहूं बेचने के लिए किसान नहीं आए हैं। ठेकेदारों के माध्यम से किसान फसल बेच रहे हैं। किसानों को सरकारी सुविधा का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
-एएस रीन, निदेशक, कृषि विभाग