सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए रोजाना जम्मू-कश्मीर की सियासत भयावह चेहरा सामने आ रहा है। सियासतदानों ने सत्ता को अपनी जागीर बना रखा है और शक्ति प्रदर्शन के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पीडीपी विधायक जावेद मुस्तफा मीर ने फेसबुक पर ऐसी ही एक तस्वीर अपलोड की है। जम्मू-कश्मीर की चडूरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक जावेद मुस्तफा मीर फेसबुक पर अपनी प्रोफाइल पिक में हाथ में एके-47 और पिस्तौल लिए हैं। उन्होंने खाकी वर्दी और बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी है।
पीडीपी नेता ने ऐसी कई तस्वीरें फेसबुक पर अपलोड की हैं। जावेद नेशनल कांफ्रेस नेता नासिर असलम वानी के बेटे हैं।
वहीं जावेद के निर्वाचन क्षेत्र के लोगों कहना है कि विधायक अकसर ऐसे ही घूमते हैं और लोगों को संबोधित करते हैं। चडूरा इलाके के एक व्यक्ति के अनुसार जब भी उन्होंने विधायक को देखा है या तो वह कभी खाकी टोपी पहने हुए होते हैं या जैकेट या फिर कभी बंदूक उठाए हुए। वह विधायक कम और सेना के जवान अधिक लगते हैं।
व्यवहार भद्दा करते हैं जावेद मुस्तफा मीर
उनकी फोटो पर टिप्पणी करते हुए मुदस्सिर रैना नामक फेसबुक यूजर ने लिखा है, ‘अपने क्षेत्र के लिए कुछ नहीं करते। आर्मी जैकेट पहनने से कोई ईमानदार नहीं दिखता। विधायक जी को इसके बजाए वह सब करना चाहिए जिसके लिए उन्हें चुना गया है।’ एक और यूजर डार निस्सार ने लिखा है, ‘डॉन एमएलए।’
अगर उनके फोटो पर की गई बाकी टिप्पणियों को पढे़ं तो साफ लगता है कि वह विधायक कम और पुलिस जवान बनकर ज्यादा घूमते हैं। गौरतलब है कि पीडीपी विधायक की इन तस्वीरों के सामने आने से समाज के हर वर्ग की ओर से सवाल पूछे जा रहे हैं।
नेकां के प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्टू के अनुसार पीडीपी में हमेशा से कई नेता रहे हैं जिनका व्यवहार भद्दा रहा है और जावेद मुस्तफा मीर भी उनमें से एक हैं।
उन्होंने कहा कि यह वही विधायक हैं, जिन्होंने चीफ इंजीनियर को उनके ही कार्यालय में थप्पड़ मारा था। उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरों से गलत संदेश जाता है।
'जान प्यारी है, इसलिए मैं ऐसे घूमता हूं'
इस मामले में विधायक मीर ने कहा कि मुझे अपनी जान प्यारी है, इसलिए मैं ऐसे घूमता हूं। एके-47 के साथ फोटो पर पूछे गए सवाल पर कहा कि जब भी कश्मीर में कोई बच्चा घर से बाहर निकलता है तो उसकी पहली नजर बंदूक पर पड़ती है तो मेरे फोटो से क्या गलत संदेश जा सकता है।
उन्हें अपने सुरक्षा कर्मियों पर भरोसा नहीं क्योंकि कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिस दौरान सुरक्षाकर्मी वीआईपी लोगों को छोड़ भाग खड़े हुए। यह तस्वीरें खींच कर उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया।