कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू जारी है। ऐसे में ज्यादातर लोग घरों में ही हैं। बच्चे तो लंबे अर्से से घरों में हैं। इस दौर में मन को शांत रखना और संयम के साथ जिंदगी बिताना सभी के लिए चुनौतीपूर्ण है। व्यक्ति कितनी भी कोशिश कर ले, एक वक्त स्थिति ऐसी आती है कि वो ऊब जाता है।
इससे वह चिंता में डूब सकता है और इसके कारण अवसाद में जा सकता है। साइकोलाजिस्ट डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि दिनचर्या में बेहतर तौर तरीकों को अपनाकर लॉकडाउन या कोविड कर्फ्यू के बीच भी जिंदगी को चिंतामुक्त, खुशहाल और स्वस्थ रखा जा सकता है। हमें हर वक्त चिंतित नहीं होना चाहिए। ये न सोचें मैं बीमार हो जाऊंगा।
खुद को व्यस्त रखने के लिए जो मन में आए वो करें, अच्छा लगेगा। घर परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ बात करें। उनको वक्त दें। परिवार से नियमित संपर्क में रहें। दुनिया में क्या चल रहा है, जरूर जाने पर दिन में केवल एक बार। कोरोना पर कम सोचें इससे चिंता और निराशा दूर होगी।
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डॉ. जगदीश थापा के अनुसार आराम से घर पर बैठें, मन को पूरी तरह से शांत रखें। ज्यादा सोचेंगे तो चिंता बढ़ेगी। दस सेकेंड तक सांस को रोके फिर उसे छोड़ें। ऐसा अभ्यास दिन में कई बार कर सकते हैं। ऐसा करने से चिंता और डर दूर होगा और आप अच्छा महसूस करेंगे। नियमित समय पर पौष्टिक आहार लेने के साथ पूरी नींद जरूर लें।
घर में पेड़ पौधे हैं तो उनकी देखभाल करें। आपको अच्छा महसूस होगा। आसपास के लोगों से छत से ही सही बात करें। छींक आने पर भी अधिकतर लोगों को यह भय हो जाता है कि कहीं उनको कोरोना तो नहीं। अगर व्यक्ति सरकार के दिशा निर्देशों का पालन कर रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग पर ध्यान दे रहा है। घर से बाहर नहीं जा रहा है और अपने हाथ समय-समय पर साफ करता है तो उसको कोरोना होने का चांस नहीं है।