जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान इफ्तखार अली का निर्वासन उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से टल गया, जिन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा था। उन्होंने कहा कि वह जन्म से हिंदुस्तानी हैं और देश की 27 साल सेवा की है, इसलिए उन्हें पाकिस्तानी कहना गलत है।
मैं हिंदुस्तानी था, हूं और रहूंगा। मुझे पाकिस्तानी न कहा जाए। हम इसी सरजमीं के हैं, राजस्व रिकॉर्ड में आपको सारे सुबूत मिल जाएंगे। यह कहना है 45 वर्षीय पुलिसकर्मी मेंढर निवासी इफ्तखार अली का। निर्वासन टल जाने से खुश इफ्तखार ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि मुझे यकीन था कि मेरे देश का नेतृत्व मुझे एक साजिश के आधार पर दुश्मन देश को नहीं सौंपने देगा। इफ्तखार ने कहा कि मेरा जन्म जम्मू-कश्मीर पुलिस और देश की सेवा के लिए हुआ है। 27 साल तक पुलिस में सेवा करते हुए देश को हमेशा सर्वप्रथम रखा है।
विज्ञापन
30 अप्रैल को वह और उनके आठ भाई-बहन को पाकिस्तान भेजा जा रहा था, लेकिन उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से निर्वासन टल गया है। इफ्तखार अली पुंछ जिले के मेंढर सब- डिविजन में रहते है। अली बताते हैं कि अपना लगभग आधा जीवन पुलिस बल को समर्पित किया है। पुलिस की विभिन्न शाखाओं में सेवा की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का वह हिस्सा उनका है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है। उनके परिवार के नौ लोगों में एक दर्जन से ज्यादा सदस्य हैं, जो पीओके के थे।