आम आदमी को सस्ती दर पर आशियाना दिलाने के लिए गठित जम्मू कश्मीर हाउसिंग बोर्ड की भारी-भरकम 160 करोड़ की पूंजी दशकों से अटकी हुई है। हाउसिंग कालोनी बनने और बाकायदा लाभार्थियों को प्लाट आवंटित होने के बावजूद कई विभाग हाउसिंग बोर्ड की भूमि पर काबिज हैं।
ऐसे में न तो भूमि मिल पा रही है और न ही उसका मुआवजा। नतीजतन अन्य विभागों के अधीन दबी पूंजी न मिलने से हाउसिंग बोर्ड के भावी प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। आवास एवं शहरी विकास विभाग के आयुक्त सचिव के माध्यम से बोर्ड सरकार को इसके लिए कई दफा गुहार लगा चुका है।
बोर्ड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बोर्ड की भूमि का सबसे बड़ा भाग अनंतनाग जिले में बनाई गई काडीपोरा हाउसिंग कालोनी का है। बोर्ड ने वर्ष 1978 में हाउसिंग कालोनी विकसित करने के लिए 804.4 कनाल भूमि खरीदकर अधिग्रहण किया।
वर्ष 1990 तक 1078 प्लाट बनाए। 116 प्लाट आवंटित कर दिए। कुछ लोगों ने आवंटन के बाद निर्माण भी कर लिया, लेकिन वर्तमान में काडीपोरा हाउसिंग कालोनी की 456.6 कनाल भूमि सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की जा रही है। कालोनी की 259.4 कनाल भूमि कश्मीर यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस द्वारा अधिग्रहीत है।
हाउसिंग बोर्ड ने जमीनी हकीकत का सर्वे करवाया तो यूनिवर्सिटी कैंपस के अधीन 90 कनाल भूमि अतिरिक्त पाई गई। इस लिहाज से सुरक्षा बलों और यूनिवर्सिटी के अधीन चल रही भूमि का कुल विस्तार 800 कनाल से अधिक पाया गया।
राज्य सरकार की ओर से बोर्ड को भरोसा ही दिलाया जाता रहा कि भूमि न मिलने की सूरत में मुआवजे की राशि का भुगतान किया जाएगा। बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर शफीक अहमद रैणा ने इस बारे में कहा कि सरकार को समय-समय पर इस बाबत लिखा जाता है।
काडीपोरा कालोनी का मुआवजा 160 करोड़ बनता है, जिसके मिलने पर हाउसिंग बोर्ड कई नए प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर सकता है। उच्च शिक्षा विभाग के पास 349.4 कनाल भूमि है जिसकी मुआवजा राशि 69.39 करोड़ रुपये है। सुरक्षा बलों के पास 456.6 कनाल भूमि है, जिसकी मुआवजा राशि 90.68 करोड़ रुपये है।