फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौथी कक्षा के सवाल में फेल हुए मास्टर जी, अब जाएंगे जेल

विज्ञापन
विज्ञापन
जेएंडके हाईकोर्ट में उस वक्त अजीब स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक मामले की सुनवाई करते हुए जज ने खुली कोर्ट में अध्यापक को गाय पर निबंध लिखने को कहा। निबंध न लिख पाने पर शिक्षक ने जज को कोरा कागज थमा दिया।
विज्ञापन


हालांकि, जज ने शिक्षक की काबिलियत आंकने के लिए उन्हें कुछ और मौके भी दिए, लेकिन वह सभी में असफल रहे। इस पर जस्टिस गंभीर हो गए और उन्होंने शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दे दिए। साथ ही सरकार को कहा कि ऐसे शिक्षकों की डिग्रियों की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया जाए।

उच्च न्यायालय के जज मुजफ्फर हुसैन अत्तर की अदालत में दक्षिण कश्मीर के एक स्कूल में तैनात आरईटी (रहबर-ए-तालीम) शिक्षक मोहम्मद इमरान खान का मामला सुनवाई के लिए आया। इसमें अध्यापक की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन

खान को मिले थे 74 प्रतिशत!

याचिकाकर्ता ने इमरान पर आरोप लगाया था कि बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली और नागालैंड की ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गई डिग्रियां मान्यता प्राप्त नहीं हैं। लेकिन, उन डिग्रियों के आधार पर शिक्षक को नौकरी दे दी गई।

डिग्री में दिखाया गया है कि खान को उर्दू में 74 प्रतिशत, अंग्रेजी में 73 प्रतिशत और गणित में 66 प्रतिशत अंक मिले हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक वरिष्ठ वकील से अध्यापक को अंग्रेजी से उर्दू में अनुवाद के लिए एक आसान पंक्ति देने को कहा।

लेकिन, अध्यापक इसमें फेल हो गया। इसके बाद अध्यापक से उर्दू में गाय पर निबंध लिखने को कहा गया, लेकिन वह नहीं लिख पाया। हालांकि, इस दौरान अध्यापक ने कोर्ट रूम के बाहर निबंध लिखने की अनुमति मांगी, जो उसे दे दी गई।
विज्ञापन

काबिलियत देख घबरा गए जज साहब

इसके बावजूद अध्यापक कुछ नहीं लिख पाया और उसने कोरा कागज जज को थमा दिया। फिर अध्यापक ने दावा किया कि गणित पर उसकी अच्छी पकड़ है। कोर्ट ने एक अन्य वकील के मार्फत अध्यापक को चौथी कक्षा का सवाल हल करने के लिए दिया, लेकिन वह इस बार भी फेल हो गया।

अध्यापक की इस काबिलियत को देख जज गंभीर हो गए और उन्होंने अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा। इतना ही नहीं, अदालत ने कहा कि अध्यापक के ज्ञान से समझा जा सकता है कि रियासत के विद्यार्थियों का भविष्य कैसा होगा। उन्होंने सरकार को एक पैनल का गठन कर गैर मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जारी डिग्रियों की जांच करवाने को कहा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें