जम्मू कश्मीर सरकार पिछले साल सितंबर में वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं पर बढ़ाईं गईं टैक्स दरों को वापस नहीं लेगी। आज विधानसभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने कहा कि, वर्तमान में इस तरह का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
भाजपा विधायक राजीव जसरोटिया ने विधानसभा से पूछा कि, क्या वैष्णो देवी मंदिर के लिए चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाओं पर पिछले साल बढ़ाए गए टैक्स को वापस लेने का कोई प्रस्ताव है? इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि, '2 सितंबर, 2015 को वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के बाद राज्य के भीतर संचालित होने वाली सभी वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं को कराधान के दायरे में लाया गया था।'
वैष्णो देवी मंदिर में चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं भी इसके दायरे में आती हैं। गौरतलब है कि इसी अधिसूचना के बाद राज्य के भीतर वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं पर 12.6 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया गया था।
यह पूछे जाने पर कि, 'क्या दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित पवित्र गुफा अमरनाथ के लिए चलने वाली हेलीकाप्टर सेवाओं पर लागू होगा?, तो इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि, 'यह टैक्स सभी वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं के लिए लागू है। यह टैक्स अकेला माता वैष्णो देवी मंदिर के लिए नहीं लगाया गया है, बल्कि राज्य में संचालित होने वाली सभी वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं पर लगाया गया है।'
अगर टैक्स अवैध है तो कोर्ट में जाएं
जम्मू-कश्मीर विधानसभा
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वित्त मंत्री ने कहा कि, यह कहते हुए अच्छा नहीं लगता कि यह टैक्स सिर्फ धार्मिक स्थान पर लगाया गया है। श्राइन बोर्ड खुद यात्रियों को दी जाने वाली सेवाओं पर टैक्स लेता है। भाजपा विधायक आर एस पठानिया और निर्दलीय विधायक पवन कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि यह टैक्स अवैध है। उड्डयन से जुड़े मामले केंद्र का बिषय हैं। वहींं पठानिया ने कहा कि, यह आदेश मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना लिया गया था।
द्राबू ने कहा कि, 'हेलीकाप्टर सेवाओं पर टैक्स वित्त विभाग द्वारा लगाया गया था। वाणिज्यिक हेलीकाप्टर सेवाओं पर टैक्स जम्मू एवं कश्मीर 1962 बिक्री कर अधिनियम के तहत लगाया गया है। यह हमारी शक्तियों के भीतर आता है। '
वित्त मंत्री ने कहा कि, 'अगर वे इसे अवैध मानते हैं तो कानून का सहारा लें। जोकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 और राज्य के संविधान के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के लिए लागू है।'