तीन अगस्त की सुबह करीब 11 बजे बसोहली के पुरथू के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त होकर रंजीत सागर झील में गिरे सेना के रूद्र हेलिकॉप्टर के अवशेषों और लापता दूसरे पायलट का कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। एक महीना बीतने के बाद भी विशेषज्ञ गोताखोरों और रिमोट से चलने वाले उपकरणों की मदद से अभियान को जारी है।
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पुरथू के इलाके में बड़ी-बड़ी मशीनें लगाई गई हैं। बेड़े की मदद से गोताखोर दिन भर डुबकी लगाकर लापता पायलट को ढूंढने में लगे हैं। सेना की ओर से इस संबंध में आखिरी जानकारी भी डेढ़ सप्ताह पूर्व सार्वजनिक की गई थी।
स्थानीय लोगों को घटना वाले इलाके में जाने की अनुमति नहीं है। उधर, बीते एक महीने में दो बार लापता पायलट कैप्टन जयंत जोशी के भाई भी अपने परिवार की स्थिति का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से भी गुहार लगा चुके हैं।