बजट में एक बार फिर पर्यटन का विकास गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग तक ही केंद्रित किया गया है। जबकि जम्मू कश्मीर के सभी 20 जिलों पर ध्यान देकर पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाना चाहिए था। पहले भी भेदभाव होता आया है। जो पहले से विकसित हैं, उन्हीं को देखा गया है।
उम्मीद थी कि जम्मू के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना बनाई जाएगी। जम्मू संभाग में धार्मिक स्थल सबसे अधिक हैं। सरकार रिकाॅर्ड 2.1 करोड़ पर्यटकों के आने की बात कर रही है, जिसमें एक करोड़ तो कटड़ा में आने वाले श्रद्धालु हैं। कटड़ा में प्रक्रिमा मार्ग की उम्मीद थी।
ये भी खारिज कर दी गई। कटड़ा में एक हजार होटल हैं। इनके विकास के लिए भी कोई योजना नहीं घोषित की गई। सुद्धमहादेव, बाबा बुड्ढा अमरनाथ, मचैल माता, कैलाश कुंड, शिवखोड़ी जैसे धार्मिक स्थल हैं। यहां वार्षिक यात्राएं होती हैं। इसके लिए विशेष प्लान तैयार किया जाना चाहिए था।छोटे पर्यटन उद्याेगों को लेकर भी हम उम्मीद कर रहे थे।
इसके लिए कोई भी घोषणा न होना काफी निराशाजनक है। एक तरफ पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की बात की जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ जम्मू की दो तीन इकाइयों को छोड़ दें तो किसी को पर्यटन उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है। न ही पुरानी इकाइयों को उद्योग के लिहाज से कोई फायदा हुआ।
पुरानी इकाइयों के पंजीकरण कराने पर औपचारिकताएं नहीं होनी चाहिए। न्यूनतम दस्तावेज इसके लिए होने चाहिए थी। कुल मिलाकर छोटी इकाइयों के लिए सरकार को कोई नई घोषणा करनी चाहिए थी। ताकि छोटे ट्रेवल एजेंट, ट्रांसपोर्टर, होटल वालों को लाभ मिलता। लेकिन इन सबको नजरअंदाज करने से निराशा हुई है। एक बार फिर सरकार ने कश्मीर के तीन पर्यटन स्थलों पर फोकस किया है, जिसका दायरा बढ़ना चाहिए था। 'राजेश गुप्ता, अध्यक्ष टूरिज्म फेडरेशन'