राज्य में पिछले महीने आई बाढ़ के कारणों का पता चल गया है। भारी बारिश और बादल फटने के कारण सितंबर में बाढ़ का कहर टूटा था। डिर्पाटमेंट आफ इंवायरमेंट, इकालजी एंड रिमोट सेंसिंग (डीईईआरएस) के साथ मिलकर नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) हैदारबाद ने संयुक्त रिपोर्ट पेश की है।
सरकार को पेश की गई रिपोर्ट में लिखा है कि जम्मू कश्मीर में सितंबर में सदी की सबसे भयानक बाढ़ आई। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश घाटी और जम्मू में बाढ़ लाने का कारण बनी। इसमें यह भी साफ तौर पर लिखा है कि थोड़े समय में भारी बारिश होना सबसे बड़ा कारण रही जिससे बादल फटने जैसी स्थिति पैदा हुई।
पानी को निकासी के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिली और इससे नदियों के किनारे टूट गये और पानी ने बाढ़ रूपी प्रलय की शक्ल इख्तियार कर ली। डीईईआरएस के वैज्ञानिक माजिद फारूक टीम के साथ एक सप्ताह से हैदारबाद में इसरो की टीम के साथ इस रिपोर्ट पर काम कर रहे थे। इसमें स्पष्ट किया गया है कि 4 सितंबर से भारी बारिश शुरू हुई।
बारिश लगातार 30 घंटे तक चली। तीन दिनों में बारिश 450 एमएम तक दर्ज की गई। रिपोर्ट में बाढ़ को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है। विभाग के निदेशक सुरेश चुग ने कहा कि भविष्य की योजनाओं के लिये यह रिपोर्ट काफी कारगार साबित होगी।