रियासत में पर्यटन, संस्कृति तथा शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में भाजपा-पीडीपी की सरकार प्रयासरत है। यहां आने वाले पर्यटकों को ज्यादा सुविधाएं मिलें, लोग यहां की यादें सहेज कर रखें, इसकी कोशिश होगी। रियासत में पर्यटन विकास, शिक्षा तथा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा, पर्यटन तथा संस्कृति राज्य मंत्री प्रिया सेठी से बृजेश कुमार सिंह ने बात की। पेश है अंश-
मानतलाई में स्प्रिचुअल रिसोर्ट बनेगा
रियासत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजा गया है। इसके तहत जम्मू संभाग के मानतलाई में स्प्रिचुअल रिसोर्ट बनेगा। राजोरी-पुंछ सर्किट का विकास होगा। गुलमर्ग तथा पहलगाम में भी पर्यटन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत रियासत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 2000 करोड़ का एलान किया गया है।
रोप वे अगले 18 महीने में
जम्मू में पर्यटन को आकर्षित करने के लिए रोप वे का काम तेजी से चल रहा है। 18 महीने में यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। मुबारक मंडी से बाग-ए-बाहु तक रोप वे का लुत्फ पर्यटक उठा सकते हैं। पत्नीटाप के रोप वे प्रोजेक्ट का काम भी शीघ्र शुरू होगा। भद्रवाह, किश्तवाड़ को पर्यटन के नक्शे पर लाया जाएगा। पीपीपी मोड के तहत गोल्फ कोर्स के पास एम्यूज पार्क तथा रणजीत सागर बांध प्रोजेक्ट को पूरा करने की योजना है।
पर्यटन भवनों का नेटवर्क बनेगा
पर्यटन को बढ़ावा देने तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए रियासत के विभिन्न स्थानों पर बने भवनों का नेटवर्क बनाया जाएगा। अब तक इनके बीच किसी प्रकार का सामंजस्य नहीं है। इस वजह से यह अपने उद्देश्यों को सही तरीके से पूरा कर पाने में सफल नहीं है। योजना है कि सभी भवनों का नेटवर्क बनाया जाए। इसका फायदा यह होगा कि पर्यटकों को एक ही स्थान से सभी प्रकार की सुविधाएं मिल सकती हैं।
सुपर 50 जम्मू में गर्मी से
सुपर 50 कोचिंग कक्षाएं जम्मू संभाग में भी शुरू की जाएंगी। इस बार गर्मी की छुट्टियों में इसे लागू किया जाएगा। श्रीनगर में ठंडी में यह योजना शुरू की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बच्चों का आईआईटी सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला हुआ है। कोचिंग में छात्रों को हर प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी और उन्हें अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिता में सफल होने योग्य बनाया जाएगा।
पांडुलिपियों का होगा आटोमेशन
रियासत में उपलब्ध पांडुलिपियों के आटोमेशन की योजना है। सभी लाइब्रेरी को भी आटोमेटेड किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि हमारी धरोहर तो सुरक्षित रहेगी ही, साथ ही इसका लाभ लोगों को मिल सकेगा। अब तक रियासत में काफी महत्वपूर्ण पांडुलिपियों के संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे इसे नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है।
संस्कृति का बनेगा कैलेंडर
रियासत में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कैलेंडर बनाया जाएगा। कला केंद्र को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। साल भर होने वाले कार्यक्रमों का कैलेंडर रहेगा और उसके अनुरूप देशभर में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। युवाओं को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। रियासत की सांस्कृतिक संस्कृति काफी मजबूत रही है। इसे फिर से बुलंदियों पर पहुंचाने की कोशिश होगी।