कश्मीर की बेटी इरफाना जरगर ने महिलाओं की जिंदगी बदलने के लिए अनूठी पहल शुरू की है। महिलाओं के मुश्किल भरे दिनों में होने वाली दिक्कतों से निजात के लिए ‘ईवा सेफ्टी डोर’ मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत वह महिलाओं के लिए बनाए गए सार्वजनिक शौचालयों में एक किट रखती हैं, जो महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात दिलाती है।
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श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके के नौशेरा इलाके की रहने वाली इरफाना जरगर ने यह कदम उस समाज में उठाया है जहां माहवारी जैसे विषयों पर महिलाएं सार्वजनिक रूप से बात करने से भी कतराती हैं। वह श्रीनगर म्युनिसिपल कारपोरेशन के ग्रिवांस सेल (शिकायत प्रकोष्ठ) में तैनात हैं। सामाजिक कार्यकर्ता इरफाना बताती हैं कि हर रोज सैकड़ों महिलाएं दूर दराज के इलाके से लाल चौक किसी न किसी काम से आती हैं। ऐसे में माहवारी के चलते कई बार महिलाओं को भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या को लेकर वह किसी से खुलकर बात भी नहीं कर सकती। इसलिए मैंने उन्हें इन परेशानियों से बचने के लिए एक पहल शुरू की है। अगर किसी महिला के साथ अचानक ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाएं तो वह यहां से मदद ले सकती है। अगर वहां सामान न मौजूद हो तो वह उनके नंबर पर कॉल कर सकती हैं। उन्हें उसी जगह किट पहुंचा दी जाएगी। इस अभियान की खासियत यह है कि इरफाना इसे अपने निजी खर्च से चला रही हैं। इस किट में सेनेटरी नेपकिन, सेनेटाइजर, महावरी के दर्द की दवाएं, टॉवल और पैंटी होंगी। ये सुविधा पूरी तरह निशुल्क है।
इरफाना के पिता की मृत्यु 2013 में हुई थी। उन्होंने अपने पिता की याद में श्रीनगर की कोर्ट रोड पर महिलाओं के लिए एक शौचालय का निर्माण किया था। इरफाना के मुताबिक वह भविष्य में भी ऐसे शौचालय बनवाएंगी।