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अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस: डुग्गर प्रदेश के लोक नृत्य हो रहे विलुप्त, कुड-हरणा-छज्जा से कभी लगती थीं रौनकें

Fri, 29 Apr 2022 11:45 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

डुग्गर प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में कुड, हरणा, छज्जा, फुम्मनियां सहित अन्य नृत्य युवा पीढ़ी से दूर हो रहे हैं। लोक नृत्य से जुड़ी संस्थाएं और लोग सरकार से इसके प्रति जागरूकता अभियान चलाने की अपील कर रहे हैं।
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jammu folk dance - फोटो : संजय कुमार
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विस्तार
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पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के इस दौर में हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत पीछे छूटती जा रही है। सैकड़ों साल से डुग्गर प्रदेश की संस्कृति की पहचान रहे लोक नृत्य अब विलुप्त हो रहे हैं। डुग्गर प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में कुड, हरणा, छज्जा, फुम्मनियां सहित अन्य नृत्य युवा पीढ़ी से दूर हो रहे हैं। सरकार की ओर से इनके संरक्षण को लेकर कोई विशेष पहल नहीं की जा रही है। लोक नृत्य से जुड़ी संस्थाएं और लोग सरकार से इसके प्रति जागरूकता अभियान चलाने की अपील कर रहे हैं। डुग्गर प्रदेश में लोक नृत्य का बड़ा महत्व है। शादी-ब्याह से लेकर फसल की बुआई और कटाई पर इन नृत्यों को प्रस्तुत किया जाता रहा है। लोक संस्कृति में बड़ा महत्व रखने वाले ये नृत्य संरक्षण की आस में अब अंतिम सांसें ले रहे हैं।

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jammu folk dance - फोटो : अमर उजाला
फसल की कटाई पर होता था कुड 
डुग्गर प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्य में कुड का बड़ा महत्व है। डुग्गर प्रदेश में कुड नृत्य फसल की कटाई के समय किया जाता था। ग्रामीण क्षेत्रों में पूरी रात कुड नृत्य होता था। लोग अपने कुलदेवता को नई फसल का भोग लगाते थे। 60 वर्ष से कुड नृत्य कर रहे मोंगरी उधमपुर के खेम राज कहते हैं कि कुड नृत्य के संरक्षण की जरूरत है। युवा पीढ़ी लोक नृत्य से दूर होती जा रही है। युवाओं को लोक नृत्य से जोड़ने के लिए सरकार को छात्रवृत्ति सहित अन्य पहल करने की जरूरत है।

Jammu Folk Dance - फोटो : अमर उजाला
खेम राज ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत सरकार स्थानीय भाषा में पढ़ाई को तो महत्व दे रही है, लेकिन इसमें लोक नृत्य के महत्व की बात होनी चाहिए थी। सरकार लोक नृत्य के संरक्षण के लिए नीति बनाए। वहीं रियासी के बकल गांव के कृष्ण लाल ने कहा कि 40 वर्ष से ज्यादा समय से वह कुड नृत्य कर रहे हैं। इसके संरक्षण की जरूरत है। युवा पीढ़ी को इससे जोड़ना होगा। अगर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया तो आने दस से 20 वर्ष में कुड नृत्य इतिहास बन जाएगा। केवल कार्यक्रम के आयोजन से लोक नृत्य का संरक्षण नहीं होगा। युवा पीढ़ी को प्रशिक्षण देकर लोक नृत्य के संरक्षण के साथ उसका प्रसार किया जा सकता है। 

Jammu Folk Dance - फोटो : अमर उजाला
लोहड़ी पर होता है छज्जा और हरणा नृत्य 
डुग्गर प्रदेश में लोहड़ी का बड़ा महत्व है। लोहड़ी पर डुग्गर प्रदेश में छज्जा और हरणा लोक नृत्य होता है जो अब लुप्त होता जा रहा है। छज्जा नृत्य से जुड़े धनी राम ने कहा कि लोक नृत्य के संरक्षण की जरूरत है। युवा पीढ़ी हमारे लोक नृत्य से जुड़े, इसके लिए सरकार की तरफ से पहल होनी चाहिए। सांस्कृतिक अकादमी को इसमें अहम भूमिका निभानी चाहिए। छज्जा का महत्व डुग्गर प्रदेश में बड़ा अहम है।

Jammu Folk Dance - फोटो : अमर उजाला
युवाओं को नृत्य से जोड़ रहीं जम्मू की तनुजा 
जम्मू की तनुजा चाहर एक पेशेवर नर्तकी होने के साथ प्रशिक्षक भी हैं। दस वर्ष की आयु से नृत्य कर रही तनुजा को हाल ही में नृत्य फिटनेस प्रशिक्षक 2022 (उत्तर क्षेत्र) का पुरस्कार मिला था। इस पुरस्कार को हासिल करने वाली वह जम्मू-कश्मीर के साथ उत्तर क्षेत्र की एक मात्र नर्तकी थीं। तनुजा ने कहा कि 15 साल से वह पेशेवर नर्तकी के रूप में काम कर रही हैं। युवाओं को ऑनलाइन व ऑफलाइन मोड पर नृत्य सिखा रही हूं। मुझसे प्रशिक्षण हासिल कर चुके बच्चे बॉलीवुड के साथ टीवी कार्यक्रम में भी हिस्सा बन चुके हैं।
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Jammu Folk Dance - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि युवाओं का नृत्य कौशल बढ़ाना मेरा उद्देश्य है। उन्होंने अपने इस सफर के दौरान कई नामी बॉलीवुड कलाकारों के साथ काम किया है। वह जम्मू-कश्मीर की सर्वश्रेष्ठ नर्तकी, युवा महिला अचीवर्स पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर जैसे पुरस्कार से नवाजी जा चुकी हैं।
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